बुध के वक्री होने की पांच अवस्थाएं होती हैं...
छाया चरण के पूर्व में
इस दौरान बुध की गति धीमी हो जाती है और वह उसी मार्ग में आगे बढ़ता है। बाद में रूक कर वक्री होना शुरु हो जाता है। छाया चरण की पूर्व अवस्था में वक्री बुध जीवन में कठिनाईयां उत्पन्न करता है। कई तरीकों से हम वक्री बुध में सहायता करते हैं जैसे अपने अंर्तमन की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करना और ब्रहमांड के संकेतों पर ध्यान ना देना।
बुध वक्री दशा
इस अवस्था में बुध वक्री होने से पूर्व धीरे होना शुरु हो जाता है। हिंदू पंचाग में इसे बैंगनी रंग में बनाया जाता है। इस दौरान आकाश बुध की स्थिति स्थिर नज़र आती है। इस अवस्था में वक्री बुध को शिखर के रूप में माना जाता है।
बुध वक्री अवस्था
वक्री अवस्था के पश्चात् बुध पीछे की ओर चलने लगता है। बुध वक्री के क्षेत्र संचार, यात्रा, सूचना वितरण, कंप्यूटर प्रोग्राम व सीखना है। इन सभी चीजों में गलतियां और विवाद भरे रहते हैं। सामान्य तौर पर एक तिहाई आबादी द्वारा बुध वक्री का प्रत्येक चरण महसूस होता है। वक्री का प्रभाव कंप्यूटर, शिक्षा एवं संचार से जुड़े लोगों पर होता है। इस दौरान बैठकों, कार्यक्रमों और प्रतिबद्धताओं पर ध्यान देना चाहिए। यह समय रूके हुए कार्यों को पूरा करने और दोस्तों से मिलने के लिए फायदेमंद होता है।
बुध प्रत्यक्ष अवस्था
इस अवस्था में आकाश में बुध के पीछे जाने की गति धीरे-धीरे कम होती नज़र आती है। वक्री बुध के शिखर पर होने की यह पंचांग में इस अवधि को भूरे रंग में दर्शाया गया है जोकि बुध वक्री अवस्था के अंतिम चरण और छाया चरण के बाद के समय के आरंभ को प्रस्तुत करता है।
छाया चरण के बाद
इस अवस्था में बुध आगे की ओर बढ़ने लगता है। अब यह वो पूरा रास्ता तय करता है जिससे यह पीछे गया था। इस अवधि के दौरान गलत निर्णय लेना, ध्यान व अवधारणा की कमी जैसी दिक्कतें आती हैं।