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Gemstone: शनि की साढ़े साती शुरू होते ही न करें नीलम पहनने की गलती, जानें रत्न चुनने का सही तरीका

Wed, 01 Jul 2026 01:37 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Gemstone For Shani Sade Sati: शनी की साढ़े साती को केवल नकारात्मक समय मानना सही नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को उसके कर्मों का फल देने वाली अवधि होती है। ऐसे में सही रत्न का चुनाव ही सकारात्मक परिणाम दिला सकता है। आइए जानते हैं कि  शनी की साढ़े साती में कौन सा रत्न धारण करना चाहिए।
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शनि की साढ़े साती में कौन सा रत्न देगा फायदा? - फोटो : AI
Best Stone For Shani Sade: जब किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़े साती का प्रभाव शुरू होता है, तो सबसे पहले मन में यही प्रश्न उठता है कि इस दौरान कौन सा उपाय करना उचित रहेगा, जिससे समस्याएं कम हो सकें। ऐसे में रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। कई लोग बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के नीलम या अन्य रत्न पहन लेते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे सही नहीं माना गया है। हर व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है, इसलिए रत्न का चयन भी उसी के अनुसार किया जाना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार साढ़े साती को केवल नकारात्मक समय मानना सही नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को उसके कर्मों का फल देने वाली अवधि होती है। ऐसे में उचित उपाय और सही रत्न का चुनाव ही सकारात्मक परिणाम दिला सकता है।
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क्या साढ़े साती में नीलम पहनना जरूरी है? - फोटो : adobe stock
क्या साढ़े साती में नीलम पहनना जरूरी है?
शनि ग्रह का प्रमुख रत्न नीलम माना जाता है, इसलिए आमतौर पर यह धारणा बन जाती है कि साढ़े साती शुरू होते ही नीलम पहन लेना चाहिए। हालांकि, यह पूरी तरह सही नहीं है। यदि जन्म कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर या अशुभ है, तो नीलम धारण करने से मानसिक दबाव, आर्थिक हानि या संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।
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क्या साढ़े साती में नीलम पहनना जरूरी है? - फोटो : अमर उजाला
यही कारण है कि बिना कुंडली विश्लेषण के कोई भी रत्न पहनना जोखिम भरा हो सकता है। कई बार नीलम के बजाय अन्य उपाय, जैसे पूजा-पाठ या दान, अधिक लाभकारी सिद्ध होते हैं।

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किन परिस्थितियों में नीलम शुभ होता है? - फोटो : abobe
किन परिस्थितियों में नीलम शुभ होता है?
जब कुंडली में शनि शुभ भाव का स्वामी होकर मजबूत स्थिति में होता है, तब नीलम पहनने की सलाह दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में यह रत्न करियर में उन्नति, आर्थिक मजबूती और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। हालांकि केवल साढ़े साती का होना नीलम पहनने का पर्याप्त कारण नहीं होता, बल्कि ग्रहों की दशा, महादशा और गोचर को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।
 
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साढ़े साती में अन्य रत्नों का विकल्प - फोटो : abode
साढ़े साती में अन्य रत्नों का विकल्प
हर व्यक्ति के लिए नीलम उपयुक्त नहीं होता। कई बार ज्योतिषी कुंडली के आधार पर पन्ना, पुखराज या ओपल जैसे रत्न पहनने की सलाह देते हैं। इनका उद्देश्य शनि को मजबूत करना नहीं, बल्कि उन ग्रहों को बल देना होता है जो व्यक्ति के लिए शुभ फलदायक होते हैं। यही वजह है कि एक ही परिवार के दो लोगों की साढ़े साती होने पर भी उनके लिए अलग-अलग रत्न सुझाए जा सकते हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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