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शनि पूजा विधि: शनि की छाया से छुटकारा पाना चाहते हैं तो शनिदेव की पूजा में बरतें सावधानियां

Sun, 15 Nov 2020 05:27 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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shani dev
शनिदेव न्याय के देवता हैं। अच्छे कर्म करने वालों से वे प्रसन्न होते हैं तो वहीं बुरे कर्म करने वालों को शनिदेव दंडित करते हैं। शनिदेव राजा को रंक और रंक को राजा बना सकते हैं। इसलिए शनिदेव को प्रसन्न रखने का सबसे अच्छा उपाय है कि अच्छे कर्म करें, किसी को बेवजह न सताएं। जीवों पर दया करें। अगर आप शनिदेव की वक्र दृष्टि से पीड़ित हैं तो ज्योतिष में शनिदेव की पूजा करने के बताया जाता है, इसलिए लोग शनि की वक्र दृष्टि से बचने के लिए उनकी पूजा-आराधना करते हैं, लेकिन शनिदेव की पूजा करते समय कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक होता है। अगर आप शनिदेव की पूजा करते समय गलतियां करते हैं तो आपको समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 
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शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनके बिलकुल सामने खड़े होकर पूजा नहीं करनी चाहिए। शनिदेव की दृष्टि से कभी भी अपनी दृष्टि नहीं मिलानी चाहिए। इन गलतियों के कारण आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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तिल
शनिदेव को काली चीजें अर्पित की जाती हैं। शनिदेव काले वस्त्र धारण करते हैं। इसलिए उनकी पूजा एवं दान के लिए काली चीजों का उपयोग किया जाता है। इसलिए शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी सफेद तिलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्हें हमेशा काले तिल अर्पित किए जाते हैं। 

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शनिदेव की कृपा पाने के लिए पीपल के पेड़ में जल अर्पित किया जाता है, साथ ही शनिदेव की कृपा पाने के लिए लोग शनि मंदिर या फिर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक भी जलाते हैं। लेकिन दीपक जलाते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि दीपक शनिदेव की मूर्ति के ठीक सामने न जलाएं बल्कि मंदिर में किसी शिला आदि पर रखकर जलाएं। 
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शनिदेव छाया पुत्र हैं। उनकी पूजा हमेशा सूर्योदय से पहले और सूर्योदय को बाद शाम के समय की जाती है। शनिदेव की पूजा या तो शाम को करे या सुबह सूर्य की किरणों के निकलने से पहले करें। 
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