11 अगस्त मध्य रात्रि के समय ग्रहों में गुरु यानी सबसे बड़ा ग्रह गोचर में सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश कर चुके हैं। मेदिनी ज्योतिष में गुरु को धन-संपदा, बैंकिंग, टैक्स, समाज कल्याण की योजनाओं, खेल-कूद, शिक्षा नीति, सोने की कीमतों आदि का कारक ग्रह माना गया है। गुरु लगभग 12 महीनों के बाद गोचर में जब राशि परिवर्तन करते हैं तो इसके प्रभाव का आंकलन देश, दुनिया, मनुष्य और राशियों के लिए किया जाता है। इससे पता चलता है कि आने वाला एक साल अब देश के लिए और उसकी जनता के लिए कैसा रहेगा।
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स्वतंत्रता दिवस से पहले जानिए, भारत और भारत की जनता के लिए अगला एक साल कैसा रहेगा
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गुरू ग्रह
70 वें स्वतंत्रता दिवस से कुछ दिन पहले गुरू का राशि परिवर्तन भारत के लिए कई संदेश दे रहा है। आजाद भारत की वृषभ लग्न की कुंडली में गुरु अब पंचम भाव में गोचर करेंगे जहां से वह धर्म स्थान नवम भाव को पांचवीं दृष्टि से, लाभ के घर यानी एकादश भाव को सातवीं दृष्टि से तथा लग्न को अपनी नवीं दृष्टि से अगले एक वर्ष तक देखेंगे। ज्योतिषशास्त्र में गुरु की दृष्टि को बहुत ही शुभ कहा गया है ऐस में गुरू कई मामलों में अपना शुभ प्रभाव देंगे।
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ग्रह नक्षत्र
आजाद भारत की कुंडली में लग्न से पंचम भाव में गुरू के आने पर गुरु खेल-कूद के क्षेत्र में देश का मान-सम्मान बढाने का संकेत देते हैं। भारतीय खिलाडी रियो में हो रहे ओलंपिक खेलों में अपने प्रदर्शन से 11 अगस्त के बाद आश्चर्यजनक रूप से सुधर लाकर भारत का सम्मान बढाएंगे।
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ग्रह
नवम भाव पर गुरु की दृष्टि पड़ने से देश में धार्मिक विवादों में तेजी आएगी। गुजरात, उत्तरप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और हरियाणा में दलित आंदोलन उग्र रूप लेकर वहाँ की सरकारों के लिए सरदर्द पैदा करेंगे। एकादश भाव पर पड़ रही गुरु की दृष्टि और चन्द्रमा में मंगल की विंशोत्तरी दशा देश में टैक्स कानूनों में सुधार लाकर सरकार की आय बढ़ाएगी लेकिन आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। गुरु के शुभ प्रभाव से मोदी सरकार देश के भीतर काला धन रखने वालों पर कड़ी कार्यवाही करके आम जनता की खूब वाह-वाही लूट सकती और सरकार की छवि बेहतर होगी।
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ग्रह
गुरु का कन्या राशि में आने वाला गोचर किसानों के 'अच्छे-दिन' ले कर आएगा। ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रन्थ भविष्यफल भास्कर के अनुसार जब गुरु (बृहस्पति) कन्या राशि पर हों तो वर्षा उत्तम हो, सब धान्य (आनाज) सस्ते हों और मनुष्य निरोगी रहे। आने वाले एक वर्ष में कन्या राशि के गुरु के प्रभाव से खेती में पैदावार बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी। आनाज और दालों के अच्छी पैदावार होने से इनकी कीमतों में कुछ कमी आएगी जिससे आम जनता को कुछ राहत मिलेगी। किन्तु अगस्त और सितंबर के महीनों में गुरु कन्या राशि के पहले नवांश मकर में रहेगे जहां वह नीच के होकर कुछ कमजोर होंगे। इस कारण से 23 अगस्त से 15 सितंबर के बीच प्राकृतिक आपदा और युद्ध से जन-धन की हानि का भी योग बन रहा है। इस दौरान सोने के कीमतों में तेजी आएगी और शेयर बाजार में मंदी का दौर शुरू होगा।
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