ठंड लोगों को कंपकंपाने लगी है। न्यूनतम तापमान छह डिग्री नीचे तक गिर गया है। मगर, किसानों के सामने इस ठंड में भी अपनी फसलों को निराश्रित पशुओं से बचाने की जद्दोजहद चल रही है। हालात यह है कि फसल बचाने के लिए किसान रात में खेतों पर पहरा देने को मजबूर है। कई किसानों ने तो मचान तक बना रखी है। कहना है कि पशु एक साथ बड़ी संख्या में खेतों में घुसकर उनकी फसल को काफी नुकसान पहुंचा रहे है। इससे निजात दिलाई जाए। गुरुवार को भी चरथावल के बिरालसी गांव निवासी किसान को आवारा गोवंश ने टक्कर मारकर उतारा मौत के घाट उतार दिया।
शाम ढलते ही आवारा पशु किसानों की गेहूं, सरसों, ईंख और चारे की फसलों को चट करने के लिए पहुंच जाते हैं। ठंड के बावजूद किसान रातभर जागकर फसलों की पहरेदारी करने को मजबूर हैं। फसलों को बचाने के लिए किसान समूह में एकत्र होकर लाठी-डंडे लेकर खेतों में पहुंचते हैं। रात के समय अलाव जलाकर ठंड से बचने के प्रयास किए जाते हैं। इस दौरान बीच-बीच में पशुओं को भगाने के लिए शोर-शराबा करने की मजबूरी भी किसानों के सामने हैं।