महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी अगुवाई में टीम इंडिया को सीमित ओवरों के मुकाबलों में कई ऐतिहासिक जीत दिलाई है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका जलवा ज्यादा नहीं चला। भारत में तो वह टेस्ट सीरीज जीतने में कामयाब रहे लेकिन विदेशी धरती पर धोनी अपनी कप्तानी का जलवा नहीं दिखा सके हैं।
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ओवल टेस्ट में मिली हार धोनी की कप्तानी में यह 14वीं हार है। अगर विदेशी धरती पर धोनी 2 और मैच गंवाते हैं तो वह दुनिया के सबसे असफल कप्तानों की सूची में वेस्ट इंडीज के ब्रायन लारा और न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग में शामिल हो जाएंगे। इन दोनों के नाम विदेशी धरती पर सबसे ज्यादा 16-16 टेस्ट मैच गंवाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है।
इंग्लैंड में हाल में मिली हार के बाद धोनी को टेस्ट टीम के कप्तान पद से हटाने का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि टेस्ट में लगातार हार के बावजूद वह इस पद पर आखिर क्यों बने हुए हैं।
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कप्तान धोनी का उत्तराधिकारी कौन?
2011 में इंग्लैंड दौरे के दौरान जब टीम इंडिया 0-4 से टेस्ट सीरीज हार गई थी तभी से उन्हें कप्तानी के पद से हटाए जाने की मांग हो रही है। उस समय के चयनकर्ताओं में से एक चयनकर्ता ने बाद में खुलासा भी किया था कि महेंद्र सिंह धोनी को बचाने के पीछे बीसीसीआई के आकाओं का हाथ है।
एक ओर विदेश में खेले गए पिछले 17 टेस्ट मैचों में से 13 में हार के बावजूद धोनी अपना पद छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे। दूसरी ओर, हालिया परिणाम को देखते हुए धोनी को बर्खास्त कर भी दिया जाए तो टीम का अगला कप्तान कौन?
लेकिन इन सब के पीछे एक सवाल यह भी उठता है कि अगर धोनी को अगर टेस्ट टीम की कप्तानी से हटा दिया जाए तो इस अगला कप्तान किसे बनाया जाए?
टीम इंडिया की टेस्ट टीम में धोनी का उत्तराधिकारी कौन हो सकता है, इस पर पड़ताल किया जाए तो गिन-चुनकर 2 ही नाम आते हैं, पहला विराट कोहली और दूसरा चेतेश्वर पुजारा।
विराट की असफलता से कमजोर हुई दावेदारी
पहले बात करते हैं टीम इंडिया के भविष्य के कप्तान कहे जाने वाले विराट कोहली की। इस दौरे से पहले कोहली से टीम इंडिया को काफी उम्मीदें थी। वनडे और ट्वंटी-20 में उन्होंने अब तक बहुत ही शानदार बल्लेबाजी की है और अब उन्हें टीम की नई रन मशीन माना जाने लगा है।
लेकिन उनकी असली परीक्षा इंग्लैंड में होनी थी, जिसमें वह बुरी तरह से नाकाम रहे। उन्होंने निचले क्रम पर बल्लेबाजी करने वाले रवींद्र जडेजा से भी कम रन बनाए। कोहली ने सभी पांचों मैच खेले, जबकि जडेजा अंतिम 2 मैच में टीम में नहीं थे।
हालांकि कोहली ने ऑस्ट्रेलिया में टीम के अपने पिछले दौरे पर टेस्ट में एक शतक लगाया था। लेकिन उन्होंने जिस तरह से इंग्लैंड में बल्लेबाजी की और एक-एक रन के लिए संघर्ष किया है, उससे यही लगता है कि उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। सभी को यही अपेक्षा होगी कि बतौर बल्लेबाज कोहली जब भी टीम की अगुवाई करें तो बल्ले से रन बनाते हुए अपने साथियों के सामने नजीर पेश करें।
पुजारा पर दांव लगाना सही नहीं होगा
अब बात करते हैं टेस्ट क्रिकेट के संपूर्ण बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा की। पुजारा को टेस्ट बल्लेबाज माना जाता है, लेकिन इंग्लैंड में अपने पहले टेस्ट दौरे में वह बुरी तरह से नाकाम रहे हैं।
शुरुआत में वह क्रीज पर कुछ देर तक जरूर टिके रहे, लेकिन अंतिम 3 टेस्ट में तो वह अन्य भारतीय बल्लेबाजों से भी गए गुजरे साबित हुए। 5 मैचों में उनकी सबसे बड़ी पारी 55 रनों की थी जो उन्होंने पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में बनाए थे।
धोनी के टेस्ट टीम से कप्तानी छोड़ने की सूरत में कोहली के बजाए पुजारा को कमान सौंपी जाती है तो काफी दबाव में आ सकते हैं। वह टेस्ट मैच में दूसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आते हैं और ऐसे में अगर उन पर कप्तानी का दबाव रहेगा तो टीम के लिए यह सही स्थिति नहीं होगी।
विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा के अलावा टीम में सभी खिलाड़ी काफी नए हैं और भारत में ऐसी परंपरा भी नहीं रही है कि किसी नए खिलाड़ी को टीम की कमान सौंपी जाए।
इन नए खिलाड़ियों में अजिंक्य रहाणे ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिनको टीम की कमान सौंपे जाने पर विचार किया जा सकता है लेकिन उनके पास सिर्फ 10 टेस्ट मैच ही खेलने का अनुभव है और इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने से पहले उन्हें अभी और परखे जाने की जरूरत है।
रहाणे के अलावा आर अश्विन टेस्ट टीम की कप्तानी के लिए दावेदार हो सकते हैं। अश्विन धोनी के पसंदीदा क्रिकेटर हैं लेकिन उनकी गेंदबाजी में एकरूपता नहीं होती, वे मैचों में लगातार विकेट लेने में सफल भी नहीं होते हैं। वह खुद 8 महीने बाद टेस्ट टीम में वापसी कर सके हैं। साथ ही उन्हें कभी भी कप्तानी के दावेदारों में शामिल ही नहीं किया गया।
इनके अलावा टीम में अन्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव होता रहा है। इसलिए टीम की लगातार हार के बावजूद धोनी की कप्तानी पर कोई खतरा बनता नहीं दिख रहा है। और यही कारण है कि ओवल में हार के बाद धोनी कहते है कि कप्तानी छोड़ने से पहले यह तय हो जाए कि इंग्लैंड में मिली हार की जिम्मेदारी किस पर बनती है।