खराब फॉर्म से जूझ रहे विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का बल्ला आखिरकार लंबे इंतजार के बाद चल निकला।
टीम इंडिया में वापसी की कोशिश में लगे सहवाग की नाकामी बुधवार को अबु धाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेले गए चैंपियन काउंटी टेस्ट मैच में जाकर खत्म हुई।
एमसीसी टीम की कप्तानी पाते ही सहवाग ने डरहम के खिलाफ 97 गेंदों में 109 रन की शतकीय पारी खेली और इसके साथ ही 16 महीने से चले आ रहे शतक के सूखे को खत्म किया। वीरू ने इससे पहले अंतिम बार नवंबर, 2012 में अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ शतक लगाया था।
वीरू की आतिशी शतक ने दिलाई जीत
अपनी इस धमाकेदार शतकीय पारी में वीरेंद्र सहवाग ने 18 चौके के अलावा और एक छक्का भी लगाया।
मैच के चौथे और आखिरी दिन एमसीसी को 51 ओवर में जीत के लिए 225 रन का लक्ष्य मिला था। सहवाग ने चौथे विकेट के लिए समित पटेल (नाबाद 48) के साथ 102 रन की साझेदारी भी निभाई। सहवाग की पारी का अंत 49वें ओवर में जेमी हैरिसन की गेंद पर हुआ। सहवाग के शतक के दम पर एमसीसी ने यह मैच आसानी से छह विकेट से जीत लिया।
इससे पहले चौथे दिन की सुबह एमसीसी ने अपनी दूसरी पारी दो विकेट पर 48 रन से आगे बढ़ाई और तब सहवाग नौ और डीजे बेल ड्रमोंड 15 रन बनाकर खेल रहे थे।
सहवाग को रोकने में नाकाम रहे गेंदबाज
वीरेंद्र सहवाग ने दिन के पहले ही ओवर में तेज गेंदबाज जेमी हैरिसन की गेंदों पर तीन चौके जड़कर अपने तेवर जता दिए।
डरहम का कोई भी गेंदबाज सहवाग की आक्रामक बल्लेबाजी पर लगाम नहीं लगा सका। सहवाग ने अपना अर्द्धशतक सिर्फ 47 गेंदों पर पूरा किया।
लंच के तुरंत बाद सहवाग ने हैरिसन की गेंद पर चौका जड़कर अपना शतक भी पूरा किया। भारतीय बल्लेबाज ने सिर्फ 88 गेंदों में सैकड़ा जड़ा।
पहली पारी में असफल हो गए थे वीरू
दूसरी पारी में धमाकेदार अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाने वाले वीरेंद्र सहवाग का बल्ला इस मैच में भी रूठा हुआ था। पहली पारी में जब वह बल्लेबाजी करने चौथे नंबर पर आए तो वह सस्ते में आउट हो गए।
सात गेंदों में वह महज पांच रन बनाकर आउट हो गए। सहवाग की अगुवाई वाली एमसीसी टीम में शामिल इंग्लैंड के फिरकी गेंदबाज मोंटी पनेसर ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में पांच विकेट हासिल किए थे। दूसरी पारी में पनेसर दो विकेट झटके थे।