जब टीम इंडिया पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने इंग्लैंड के लिए रवाना हुई थी तब सभी की नजर विराट कोहली पर टिकी थी क्योंकि इस टीम में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, गौतम गंभीर और तेज गेंदबाज इशांत शर्मा को ही इस देश में टेस्ट मैच खेलने का अनुभव था।
विज्ञापन
सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास लेने के बाद भारतीय टेस्ट टीम का यह पहला दौरा था और इस सभी को उम्मीद थी कि सचिन का दूसरा रूप कहे जाने वाले विराट कोहली इस बार यहां पर कमाल करेंगे।
लेकिन जिस तरह से उन्होंने पिछले 4 टेस्ट मैचों में प्रदर्शन किया, उससे प्रशंसकों को खासा निराशा हुई है। पिछली 8 पारियों में कोहली 2 बार तो खाता भी नहीं खोल सके और एक पारी में 40 से ज्यादा रन भी नहीं बना पाए।
विज्ञापन
अभी भी याद है ऑस्ट्रेलिया में कोहली की यादगार पारियां
2011-12 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच के दौरान ओवल में जिस किसी ने विराट कोहली की 116 रन की शतकीय पारी देखी, वो आजतक उस नायाब पारी को नहीं भूल पाया होगा।
जिस विकेट पर सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और वीवीएस लक्ष्मण जैसे धुरंधर 30 रनों का आंकड़ा पार नहीं कर सके उस विकेट पर कोहली अकेले ही डटे रहे।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कोहली ने 8 पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक के साथ 51.81 की औसत से सर्वाधिक 300 रन बनाए थे। वहीं कोहली के बाद सचिन की 8 पारियों में 35.87 की औसत से कुल 287 रन थे जिसमें सिर्फ 2 अर्धशतक थे।
इंग्लैंड आते ही रूठ गया कोहली का बल्ला
उस दौरे पर भले ही टीम इंडिया 0-4 से टेस्ट सीरीज हार गई हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट को भविष्य का सचिन तेंदुलकर मिल गया था।
इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले विराट कोहली से सभी को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी और टीम की बल्लेबाजी का दारोमदार भी उनके कंधों पर टिका था। लेकिन इसे उम्मीदों का दबाव कहिए या खराब किस्मत, इंग्लैंड दौरे पर कोहली ने सभी को निराश किया और 8 पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ 108 रन निकले।
कोहली की असफलता का असर टीम इंडिया के प्रदर्शन पर पड़ा और टीम 5 मैचों की सीरीज में 2-1 से पिछड़ गई है। मैनचेस्टर टेस्ट में तो हद ही हो गई कि कोहली दोनों पारियों में कुल 10 रन (0, 7 रन) भी नहीं बना सके।
खराब फॉर्म पर कोहली की हो रही आलोचना
इंग्लैंड में लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद विराट कोहली आलोचकों के निशाने पर आ गए। किसी को उनकी तकनीक में कमी दिखी तो किसी को उनमें प्रतिबद्धता की कमी नजर आई।
कई आलोचकों ने कोहली को सचिन तेंदुलकर का विकल्प मानने से इनकार कर दिया।
हालांकि कई आलोचकों का यहां तक कहना है कि उनकी बल्लेबाजी में गिरावट गर्लफ्रेंड अनुष्का शर्मा के साथ रोमांस करने के कारण आई है। ऐसी खबरें आई थी कि बीसीसीआई ने कोहली को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ इंग्लैंड में रहने की अनुमति दे दी थी लेकिन एक ओर जहां कोहली को खुशी मिली तो दूसरी ओर उनका फॉर्म जाता रहा और अब तक इंग्लैंड में एक पारी में 40 रन भी नहीं बना सके हैं।
क्या वास्तव में विराट कोहली में सचिन तेंदुलकर जैसी प्रतिभा नहीं है? यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो आलोचक गलत साबित होते हैं।
तेंदुलकर और कोहली के विदेश में खेले गए शुरुआती 15 टेस्ट मैचों के प्रदर्शन पर नजरें डाले तो विराट रनों के मामले में मास्टर ब्लास्टर से आगे खड़े दिखते हैं।
मास्टर ब्लास्टर ने शुरुआती 15 टेस्ट मैचों में 42.35 की औसत से 3 शतकों सहित 945 रन बनाए थे। वहीं कोहली के नाम 15 टेस्ट मैचों में 34.64 की औसत से 3 शतकों सहित कुल 970 रन हैं।
ऐसे में 25 साल का युवा बल्लेबाज कहीं से भी सचिन से पिछड़ता हुए नजर नहीं आ रहा। माना अभी विराट का खराब समय चल रहा है लेकिन उम्मीद करिए जल्द ही वह लय में लौट आएं और अपने उस अंदाज में बल्लेबाजी करें जिसके लिए वह जाने जाते हैं।