उत्तराखंड सरकार भले ही खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के तमाम वादे कर ले, लेकिन हकीकत में हमारे ‘अपने’ ही सरकार की इस कोशिश में पानी फेर रहे हैं।
हर साल की तरह ही इस बार भी हमारे राज्य के तैराक नेशनल प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन का सपना संजोए हुए थे, लेकिन उत्तराखंड स्वीमिंग एसोसिएशन ने उनके इस सपने को तोड़ दिया। न तो अंतिम तिथि तक स्वीमिंग के ट्रायल हुए और न ही नेशनल प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण। एसोसिएशन अंतिम तिथि तक खिलाड़ियों को सिर्फ टरकाती ही रही।
13 से 19 जुलाई तक पुणे (महाराष्ट्र) में 42वीं ग्लेनमार्क जूनियर नेशनल एक्यूटिक चैंपियनशिप का आयोजन होना है। प्रतियोगिता का आयोजन महाराष्ट्र स्टेट एक्यूटिक एसोसिएशन करा रही है। एसोसिएशन ने प्रतियोगिता में प्रवेश की अंतिम तिथि 15 जून तय की थी।
नियमों के अनुसार इससे पहले राज्य में स्वीमिंग के ट्रायल हो जाने चाहिए थे, लेकिन अंतिम समय तक ट्रायल नहीं हुए। नेशनल स्वीमर मनोज जोशी, काशीपुर के तुषार रावत का कहना है कि इस संबंध में कई बार उत्तराखंड स्वीमिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बात की गई, लेकिन हर बार उनसे यही कहा गया कि टीम प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी।
पर पंजीकरण की तिथि के दिन उनसे कहा गया कि टीम प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेगी। खिलाड़ियों ने एसोसिएशन से राज्य में स्वीमिंग के ट्रायल कराने और टीम का नेशनल इवेंट के लिए पंजीकरण कराने की मांग की है।
खेल प्रेमी पूरन सिंह रजवार का कहना है कि जब उन्होंने इस संबंध में भारतीय ओलंपिक संघ के सचिव राजीव मेहता और उत्तराखंड स्वीमिंग एसोसिएशन की सचिव दीपा मेहता बात की तो पहले तो उन्होंने कहा कि टीम नेशनल इवेंट में हिस्सा लेगी, लेकिन इसके एक दिन बाद ही उन्होंने इससे इंकार कर दिया।
श्री रजवार का कहना है कि रविवार को उन्होंने जिलाधिकारी दीपक रावत से इसकी शिकायत की है। डीएम ने कहा कि वह इस मामले में कार्रवाई करेंगे। साथ ही हल्द्वानी में प्रदेश भर के खिलाड़ियों के लिए स्वीमिंग का ट्रायल भी जल्द ही कराएंगे।