उत्तराखंड में वर्ष 2018 में राष्ट्रीय खेल प्रस्तावित हैं, लेकिन इसमें राज्य का कोई पारंपरिक खेल होता नहीं दिखाई देगा।
खेल विभाग और खेल आयोजन स्थलों को देख रही कंपनी को पूरे राज्य में ऐसा कोई खेल नहीं मिल पाया है, जिसे राष्ट्रीय खेलों में शामिल किया जा सके। हालांकि खेल विभाग की खोज जारी है, लेकिन आने वाले समय में ऐसे किसी खेल के शामिल होने की उम्मीद कम ही है।
38वें राष्ट्रीय खेल साल 2018 की ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी दून में बन रहे राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होनी है। मगर राष्ट्रीय खेल में होने वाले खेलों की फाइनल सूची का इंतजार है।
मुंबई की नाइटफ्रेंक और कोलाज कंपनी प्रस्तावित आयोजन स्थलों के साथ ही अन्य जगहों का दौरा कर खेल आयोजन स्थलों के लिए उपलब्धता देख रही है। लेकिन अभी तक कंपनी को उत्तराखंड में कोई पारंपरिक खेल नहीं मिल सका है। दरअसल, राष्ट्रीय खेल में मेजबान राज्य को करीब चार खेलों में परिवर्तन करने का अधिकार होता है।
साथ ही एक या दो पारंपरिक खेल भी शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन इनके मेडल राष्ट्रीय खेल की पदक तालिका में नहीं जुड़ते। केरल में हुए राष्ट्रीय खेल 2015 में भी एक स्थानीय खेल (मार्शल आर्ट) को शामिल किया गया था। उपनिदेशक खेल अजय अग्रवाल का कहना है कि सभी चाहते हैं कि कोई पारंपरिक खेल शामिल हो।
हमें बताएं क्या हैं उत्तराखंड के पारंपरिक खेल
राष्ट्रीय खेल 2018 में उत्तराखंड का पारंपरिक खेल क्या हो सकता है? इसका जवाब आप हमें दे सकते हैं। राज्य के हर जिले, तहसील, गांव में कुछ न कुछ पारंपरिक खेल होते रहते हैं।
जिसे राष्ट्रीय खेल के माध्यम से नई पहचान दी जा सकती है। इसके लिए आप editor@ddn.amarujala.com पर खेल से संबंधित जानकारी और उसकी फोटो भेज सकते हैं।