उत्तराखंड खेल विभाग के तमाम पुरस्कार घोषणा के साथ ही विवादों में आ गए हैं। इन पुरस्कारों की दौड़ में शामिल रहे अन्य प्रतिभागियों ने राज्य सरकार पर बाहरी लोगों को पुरस्कार देने का आरोप लगाया है। आरोप है कि जिन लोगों को पुरस्कार देने की घोषणा की गई है, उनका प्रदेश के खेल और खिलाड़ियों से कोई सरोकार नहीं है।
रविवार को खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित हाई पावर कमेटी ने खिलाड़ी और प्रशिक्षक के रूप में हंसा मनराल के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें लाइफ टाइम एचीवमेंट के लिए चुना था। इसके अलावा स्व. राम बहादुर क्षेत्री को देवभूमि उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार और रेनू कोहली को देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य पुरस्कार देने की घोषणा की थी।
पुरस्कारों की घोषणा के दूसरे ही दिन इनका विरोध शुरू हो गया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि पुरस्कार के लिए चयनित होने वालों ने कभी प्रदेश या प्रदेश के खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए कार्य नहीं किया।
रेनू कोहली या हंसा मनराल ने उत्तराखंड के कितने खिलाड़ियों को फायदा पहुंचाया। उनकी कोचिंग से प्रदेश के कितने खिलाड़ियों को लाभ मिला। केवल उत्तराखंड में जन्म लेने के नाते उन्हें पुरस्कार दे दिया गया, जबकि उन्होंने जो काम किया वह दूसरे राज्यों के लिए किया था।
- कृष्ण कुमार, हॉकी कोच
प्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन में योगदान करने वालों की अनदेखी की गई है। रेनू कोहली हमेशा दिल्ली में रही। उत्तराखंड के खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कोई काम नहीं किया। एक भी खिलाड़ी को इन्होंने ट्रेनिंग नहीं दी।
- पवन कुमार शर्मा, कुश्ती कोच