बॉक्सिंग की दुनिया में पिथौरागढ़ के बेटा-बेटी ने मान सम्मान बढ़ाया है। आसाम में चल रही नेशनल सीनियर महिला बॉक्सिंग में शनिवार को जहां पिथौरागढ़ की कृष्णा थापा ने कांस्य पदक जीतकर उत्तराखंड की झोली में पहला पदक डाला वहीं, पिथौरागढ़ के ही मुक्केबाज कविंद्र सिंह बिष्ट ने साउथ कोरिया में हुए वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में अपने मुक्कों के दम पर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। यह बात अलग है कि उन्हें क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा।
29 अक्तूबर से आसाम में शुरू हुई 16वीं नेशनल सीनियर महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो दिन मेडल का सूखा रहने के बाद तीसरे दिन उत्तराखंड को पहला मेडल मिला। 2008 में बॉक्सिंग कॅरिअर की शुरुआत करने वाली पिथौरागढ़ की कृष्णा थापा ने 2009 में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में पहला गोल्ड जीता।
इस दौरान उन्हें बेस्ट बॉक्सर का अवार्ड भी मिला। 2010 में झारखंड में हुई नेशनल प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड जीता था। इसके बाद 2013 में बीमार होने के बाद कृष्णा ने बॉक्सिंग को अलविदा कह दिया। 2014 में उन्होंने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग प्रतियोगिता में सिल्वर जीतकर वापसी की। 2015 में केरल में हुए नेशनल गेम्स में कृष्णा ने ब्रांज मेडल हासिल किया।
उधर शनिवार को काशीपुर में अपने साई कोच हरजिंदर सिंह संधू से मिलने आए कविंद्र बिष्ट ने बताया कि 2 से 11 अक्तूबर तक साउथ कोरिया में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का आयोजन हुआ था, जिसमें भारत की टीम में वह उत्तराखंड से इकलौते खिलाड़ी थे।
बिष्ट ने बताया कि सीनियर वर्ग की पहली फाइट में उन्होंने तुनेशिया जबकि दूसरी फाइट में बहरीन के खिलाड़ी को हराया। लेकिन क्वार्टर फाइनल में वह कोरिया के खिलाड़ी से काफी कम अंतर से हार गए। वर्तमान में वह पटियाला में इंडिया कैंप में तैयारी कर रहे हैं और एयरफोर्स बंगलूरू में तैनात हैं। बिष्ट ग्राम पंडा पिथौरागढ़ के निवासी हैं।
उन्होंने 2009 से 2014 तक काशीपुर साई के कोच हरजिंदर सिंह संधू से ट्रेनिंग ली है। उन्होंने दो बार स्कूल नेशनल में स्वर्ण, नेशनल सुपर कप में कांस्य पदक जीता है, जबकि ऑल इंडिया अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर बेस्ट बॉक्सर भी रहे हैं। उन्होंने 2013 में फिलीपिंस में हुई यूथ जूनियर चैंपियनशिप में भी प्रतिभाग किया था।