एन रामाचंद्रन भले ही वर्ल्ड स्क्वैश फेडरेशन के अध्यक्ष हों। लेकिन उनका नाम कभी भी सुर्खियों में नहीं रहा। इसके उलट उनके भाई एन श्रीनिवासन बीसीसीआई अध्यक्ष होने के नाते हमेशा ही विवादित सुर्खियों में बने रहे।
लेकिन अब श्रीनिवासन की तरह रामाचंद्रन भी खेलों के सरदार बन गए हैं। एक भाई क्रिकेट की सत्ता संभालेगा तो दूसरे ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की कमान अपने हाथों में ले ली है। यानि की ये दोनों भाई अब एक साथ खेलों पर राज करेंगे।
सिर्फ देश में ही इनका खेलों पर कब्जा नहीं रहेगा बल्कि दुनिया के दो मजबूत खेलों की कमान भी इन्हीं के हाथों है। रामाचंद्रन पहले ही वर्ल्ड स्क्वैश संघ के अध्यक्ष हैं और श्रीनिवासन जल्द ही आईसीसी के चेयरमैन बनने जा रहे हैं।
'बीसीसीआई से कुछ भी लेना देना नहीं'
आईओए अध्यक्ष बनने के बाद ही रामाचंद्रन ने साफ कर दिया कि बीसीसीआई से उनका कोई लेना देना नहीं है। वह स्क्वैश और आईओए के काम पर ही ध्यान देंगे। उन्होंने यह भी कह दिया कि भले ही वह आईओए के अध्यक्ष बन गए हों लेकिन वर्ल्ड स्क्वैश फेडरेशन के अध्यक्ष पद से वह इस्तीफा नहीं देंगे।
उन्होंने चुनाव खत्म होने के बाद यहां आए आईओसी ऑब्जर्वरों से भी यही प्रार्थना की है कि भारत से जल्द से जल्द प्रतिबंध हटाया जाए। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) के आब्जर्वरों की निगरानी में इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के चुनाव रविवार को संपन्न हो गए। इसके साथ ही भारत की ओलंपिक में वापसी का रास्ता साफ हो गया है।
आईओसी आब्जर्वर पीयरे मियरो ने कहा है कि भारत से जल्द प्रतिबंध उठा लिया जाएगा। हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि प्रतिबंध कब हटेगा? लेकिन माना जा रहा है कि यह अगले कुछ दिन में हो सकता है। जिससे सोचि विंटर ओलंपिक के समापन समारोह में तिरंगा लहराया जा सकता है। आधिकारिक रूप से आईओसी कार्यकारिणी की बैठक 23 फरवरी को है। लेकिन इससे पहले आईओसी अध्यक्ष ने कोई बैठक बुलाई तो उसमें भारत के प्रतिबंध का मामला रखा जा सकता है।
निर्विरोध चुने गए एन रामाचंद्रन
देर शाम घोषित नतीजों में एन रामाचंद्रन को निर्विरोध अध्यक्ष, राजीव मेहता को सेक्रेटरी जनरल और अनिल खन्ना को ट्रेजरॉर चुना गया। अनुराग ठाकुर, बीपी बैश्या समेत आठ उपाध्यक्ष वोटिंग के जरिए चुने गए। जिसमें रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की राजलक्ष्मी सिंह देव को हार का सामना करना पड़ा।
खास बात यह रही है कि चुनाव के दौरान हर उस बात से बचा गया जिससे आगे परेशानी नहीं खड़ी हो। वोटिंग अधिकार होने के बावजूद ललित भनोट और अभय चौटाला ने वोट नहीं डाले। लेकिन आईओए के थिंक टैंक की उस वक्त पोल खुल गई जब आईओए संविधान के मुताबिक ओलंपिक में खेलने वाले खेल संघों की भागीदारी अधिक होने के मुद्दे पर उसे अपने दो अधिकारियों को इस्तीफा दिलाना पड़ा।
संयुक्त सचिव आनंदेश्वर पांडे व कार्यकारिणी सदस्य अधीप दास ने बाद में इस्तीफा देकर कुल बचे 25 सदस्यों में ओलंपिक खेल संघों की संख्या 13 कर दी। इसी तरह कुल 138 वोट डाले गए जिसमें 70 ओलंपिक और 68 नॉन ओलंपिक खेल संघों के थे। नॉन ओलंपिक संघों के वोटों की संख्या ज्यादा नहीं हो जाए इसके लिए कुछ वोट डाले ही नहीं गए। वहीं फुटबाल संघ को तकनीकि गड़बड़ियों के चलते वोट डालने से रोक दिया गया।