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उत्तराखंड उदय पर देहरादून में शुरू हुए पारंपरिक खेल

Thu, 05 Nov 2015 01:55 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के 16वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड उदय के तहत ‘नशे के खिलाफ जंग, परंपरागत खेल खेलेंगे हम’ का आयोजन बृहस्पतिवार से हो रहा है। पांच दिवसीय यह अनूठा आयोजन कांग्रेस प्रदेश महासचिव आनंद सिंह रावत की पहल पर शुरू हो रहा है।
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गौरतलब है कि अमर उजाला ने प्रदेश के पारंपरिक खेलों के बारे में प्रदेश के बूढ़े-बुजुर्गों से नाम-नियम आदि की जानकारी हासिल की थी। फिर एक श्रृंखला का प्रकाशन किया था, कि परंपरागत खेलों का डॉक्युमेंटेशन हो सके। कांग्रेस महासचिव रावत ने इस श्रृंखला को जमीन पर उतारने का काम किया है।

रावत कहते हैं कि उत्तराखंड उदय की अवधारणा युवा वर्ग की ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाए बिना पूरी होना संभव नहीं है। इसलिए उत्तराखंड उदय के आयोजन पर प्रदेश के युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी ऊर्जा का सदुपयोग परंपरागत खेलों को बढ़ावा देने में किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि ओएनजीसी के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टेडियम में पांच से नौ नवंबर के बीच यह आयोजन किया जाएगा। इसमें पांच नवंबर को सभी 12 केंद्रीय विद्यालयों के बच्चे, छह नवंबर को 12 राजकीय इंटर कॉलेजों के छात्र, सात नवंबर को दस कान्वेंट स्कूलों के छात्र, आठ नवंबर को पुलिस, पत्रकार, अभिभावक और नौ नवंबर को देहरादून के निजी और संस्थागत कालेजों के छात्र हिस्सा लेंगे।

इसमें उत्तराखंड के परंपरागत खेल बट्टी, पिट्ठू, फुटशाल, मुर्गा झपट और बाघ-बकरी में हर स्कूल से 30 छात्र (15 छात्र, 15 छात्राएं) प्रतिदिन हिस्सा लेंगे। पारंपरिक खेलों के सभी प्रतिभागियों को मेडल दिए जाएंगे, साथ ही उन्हें उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का भी मौका मिलेगा।

आयोजन में युवाओं को उत्तराखंड के पारंपरिक खेल में शामिल करने के साथ ही नशे के खिलाफ भी जागरूक किया जाएगा। इन खेलों के आयोजन के पीछे मकसद प्रदेश के 16वें वर्ष में प्रवेश करने के मौके पर राज्य को ड्रग्स मुक्त कराना है।
- आनंद सिंह रावत, कांग्रेस प्रदेश महासचिव

परंपरागत खेल और नियम  
पिट्ठू:
- यह किशोर अवस्था की लड़कियों का पारंपरिक खेल है। खेल का मैदान 15 मीटर रेडियस का एक सर्किल होगा। इसके मध्य में दस गिट्टियां एक के ऊपर एक क्रमवार रखी जाएंगी। बॉल से गिट्टियों को मारने की जगह चार मीटर की दूरी पर होगी।
- टीम ए के खिलाड़ी कपड़े या रबर बैंड से बनी बॉल से पिट्ठू की गिट्टियों को गिराने के लिए मारेगी। टीम बी फिल्डिंग के रूप में कैच द्वारा या बॉल से मारकर टीम ए के खिलाड़ियों को आउट करने की कोशिश करेगी।
- पिट्ठू की गिट्टियों को गिराने के लिए एक खिलाड़ी को बॉल से सिर्फ तीन बार का ही मौका मिलेगा। अगर तीन बार में गिट्टियां नहीं गिरती हैं तो उस खिलाड़ी को आउट करार दिया जाएगा।
- अगर अंत में दोनों टीमें बराबरी पर रही तो दोनों टीमों को एक-एक मौका अलग से मिलेगा और इसमें अंक अर्जित करने वाली टीम को विजयी घोषित किया जाएगा।

मुर्गा झपट:
- इस खेल के मैदान में दो गैलरियों के मध्य में दो मीटर रेडियस का एक सर्किल होगा। इस रेडियस के भीतर ही दो मिनट का निर्णायक खेल होगा।
- दोनों टीमों को कुल छह-छह खिलाड़ी खिलाने हैं। हर खिलाड़ी सामने वाली टीम के वजन के बराबर वाले खिलाड़ी से ही खेलेगा।
- हर खिलाड़ी को दो मिनट का समय मिलेगा। इसी वक्त में विरोधी खिलाड़ी को गिराकर अपनी टीम के लिए अंक अर्जित किए जाएंगे।
- इसी क्रम में तीन खिलाड़ी खेलने के बाद दो मिनट का ब्रेक होगा।
- एक खिलाड़ी दोनों हाफ में केवल एक बार ही प्रतिभाग कर सकेगा।
- दोनों हाफ के बाद अगर किसी कारण वश दोनों टीमों के अंक बराबर रहते हैं तो तीन मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

फूटसाल:
- मैदान की लंबाई 90 फीट और चौड़ाई 60 फीट होगी। गोल पोस्ट की ऊंचाई 7 फीट और चौड़ाई 10 फीट होगी। गोल पोस्ट से 25 फीट की दूरी पर डी मार्क किया जाएगा।
- एक टीम में कुल छह खिलाड़ी होंगे। पांच खिलाड़ी मैदान में प्रवेश करेंगे। किसी खिलाड़ी के थक जाने पर छठा खिलाड़ी उसकी जगह मैदान में जा सकेगा।
- किसी भी टीम का कोई भी खिलाड़ी ऊंचा हिट नहीं मार सकता है।
- पेनल्टी कार्नर, पेनल्टी सूट आउट और कार्नर आदि सभी नियम लगभग फुटबाल से मेल खाते हैं।

बाघ-बकरी:
- नई सदी में अपने परंपरागत खेलों के साथ शतरंज की बिसात के समान इस खेल (बाघ-बकरी) को एक नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से की जाने वाली पहल का एक हिस्सा है।
- इस खेल में 20 बकरियां और चार बाघ से बिसात बिछाई जाएगी।
- खेल में दोनों प्रतिभागियों को कुल 15 मिनट का समय मिलेगा।
- बकरी वाले के लिए पांच मिनट में अपनी सभी 20 बकरियों को बोर्ड की बिसात पर उतारने का समय दिया जाएगा।
- अगर बकरी वाला वाला खिलाड़ी पांच मिनट के अंतराल में अपनी सभी बकरियां बोर्ड पर नहीं उतार सका तो हारा हुआ घोषित होगा। विपक्षी यानी बाघ वाला खिलाड़ी विजयी घोषित होगा।

बट्टी:
- यह खेल एक मेज के ऊपर खेला जाएगा। जिसमें एक खिलाड़ी मेज एक सिरे पर और दूसरा खिलाड़ी मेज के दूसरे सिरे पर खड़ा होकर खेलेगा।
- एक टीम में केवल छह खिलाड़ी प्रतिभाग करेंगे, लेकिन यह प्रतियोगिता दो खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा की प्रतियोगिता होगी यानी एकल प्रतियोगिता।
- प्रतियोगिता में एक बार में टीम ए का एक खिलाड़ी और टीम बी का एक खिलाड़ी होगा। अधिक अंक प्राप्त करने वाला विजेता और कम अंक अर्जित करने वाला उपविजेता होगा।
- प्रतियोगिता में पत्थर की गोल पांच बट्टियां होंगी। एक बट्टी को उछालकर पहले एक-एक, दूसरी बार में दो-दो और तीसरी बार में तीन व एक बट्टी और चौथी बार में चारों बट्टियां एक साथ पकड़नी होंगी। यहां तक पहुंचने पर केब बनाकर यानी एक हाथ का केब बनेगा और दूसरे हाथ से बट्टियां केब के अंदर डालनी होंगी। दूसरी टीम का खिलाड़ी केब के बाहर एक बट्टी को चिन्हित करेगा। जिसे एक बार में ही केब के अंदर से ही पार करना होगा। केब का राउंड पूर्ण करने के बाद सारी बट्टियां हाथ में पकड़ कर उछालते हुए हाथ की उलटी ओर पकड़ी होगी और उछालकर सीधे हाथ में पकड़ना होगा। जितनी बट्टियां पकड़ी गई उतने अंक जुड़ जाएंगे। इस प्रकार सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाला विजेता और कम अंक वाला उपविजेता होगा।
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- अगर दोनों खिलाड़ी बराबरी पर रहे तो दोनों को एक-एक मौका फिर से दिया जाएगा।
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