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हॉकी का यह पारंपरिक रूप देख चौंक जाएंगे आप

Wed, 08 Jul 2015 04:29 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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हॉकी के जैसा मैदान, लेकिन न गोलकीपर और न ही गोलपोस्ट फिर भी जीत गोल करने पर ही होती है। यह है उत्तराखंड का पारंपरिक खेल ‘हिंगोड़’।
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हॉकी से मिलते-जुलते इस खेल में मैदान के बीच में एक गड्ढा बनता है, जिसमें अधिक बार गेंद डालने वाली टीम को विजेता चुना जाता है। अमर उजाला के उत्तराखंड के पारंपरिक खेलों को खोजने के अभियान में यह पहला पारंपरिक खेल सामने आया है।

फसल कटने के बाद गांव के खेतों में क्रिकेट, वालीबाल, फुटबाल आदि खेल खेलते बच्चे दिखाई देते हैं। मगर पारंपरिक खेल शायद ही किसी को नजर आता है। देहरादून जिले के आदर्श विहार हरबर्टपुर निवासी ओमप्रकाश उनियाल का कहना है कि पुराने समय में फसल कटने के बाद खेत खाली हो जाते थे, तब किसी चौड़े और लंबे खेत को मैदान के रूप में चुना जाता था।
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मैदान के बीचोंबीच ओखली के आकार का एक छोटा गड्ढा बनाया जाता था, जो गोल के लिए होता था। इस खेल में हॉकी की स्टिक जैसी मुड़ी हुई किसी पेड़ की टहनी को लिया जाता था। जो अधिकतर पयां नाम के पेड़ की टहनी से बनाई जाती थी, क्योंकि यह सबसे अधिक मजबूत मानी जाती थी। पुराने कपड़ों की एक छोटी गेंद बनाई जाती थी।

हॉकी की तरह इसमें दोनों ओर जाल लगाने की जरूरत नहीं होती थी और न ही गोलकीपर खड़ा करने की। खिलाड़ियों को दो पक्षों में बांटा जाता था और जो पक्ष जितनी बार गेंद गड्ढे में डालता था, उसके उतने गोल माने जाते थे। अधिक गोल करने वाली टीम विजयी मानी जाती थी। अब इस खेल का महत्व खत्म हो गया है।

हमें बताएं क्या हैं राज्य के पारंपरिक खेल
राष्ट्रीय खेल साल 2018 में उत्तराखंड में आयोजित किया जाना है। इसमें आयोजक प्रदेश का एक पारंपरिक खेल शामिल किया जाता है, लेकिन उत्तराखंड में अभी तक कोई पारंपरिक खेल सामने नहीं आया है। हालांकि इसे खोजने की प्रक्रिया चल रही है लेकिन खेल विभाग का कहना है कि अभी तक उनकी जानकारी में ऐसा कोई खेल नहीं आया है।

अमर उजाला अपने पाठकों की मदद से राज्य के पारंपरिक खेल को सामने लाना चाहता है ताकि वह साल 2018 में होने वाले राष्ट्रीय खेलों में शामिल किया जा सके। इस संबंध में आपके पास यदि किसी पारंपरिक खेल के बारे में जानकारी है तो उसके बारे में विस्तार से हमें लिखें। उसे अमर उजाला में प्रकाशित किया जाएगा।
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पता यह है
आप editor@ddn.amarujala.com पर मेल कर सकते हैं अथवा अमर उजाला, शेड नंबर-2 औद्योगिक क्षेत्र पटेलनगर, देहरादून पर पत्र भी भेज सकते हैं। लिफाफे पर उत्तराखंड के पारंपरिक खेल जरूर लिखें।
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