क्रिकेट के इतिहास में टेस्ट मैच का आगाज आज ही के दिन 137 साल पहले हुआ था। यह ऐतिहासिक मैच 15 मार्च, 1877 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेला गया।
उस समय आईसीसी जैसी किसी वैश्विक संस्था का निर्माण नहीं हुआ था। इंग्लैंड को क्रिकेट का जन्मदाता कहा जाता है। पहले टेस्ट मैच से पूर्व इंग्लैंड की क्रिकेट टीम ने जेम्स लिलीव्हाइट के नेतृत्व में चार बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया।
इस मैच को खेले जाने से पहले इसे दो देशों के बीच टेस्ट मैच के रूप में प्रसारित नहीं किया गया था लेकिन बाद में इसे औपचारिक रूप से पहले टेस्ट का दर्जा दे दिया गया।
बेहद दिलचस्प रहा टेस्ट मैच का शुरुआती सफर
आज भले ही टेस्ट मैचों के लिए ढेरों नियम बना दिए गए हो और उसके पालन के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) जैसी वैश्विक नियामक संस्था है।
लेकिन आज से सवा सौ साल पहले क्रिकेट के लिए ऐसी कोई संस्था नहीं थी। उस समय टेस्ट मैच पांच दिनों का नहीं होता था। मैच के दौरान दिन की भी कोई सीमा नहीं होती थी और खेल तब तक जारी रहते थे जब तक दोनों टीमों आलआउट नहीं हो जाती थी।
हालांकि दोनों में 11-11 खिलाड़ी तब भी रखे जाते थे। लेकिन पहले टेस्ट मैच में एक ओवर में चार गेंद ही डाले गए थे। इंग्लैंड के गेंदबाज जेम्स साउदर्थन टेस्ट करियर शुरू करने वाले सबसे बुजुर्ग क्रिकेटर बने। उन्होंने 49 साल 119 दिनों की उम्र में पहला टेस्ट मैच खेला था। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में 165 रन बनाने चार्ल्स बर्नेमन के नाम एक रिकॉर्ड आज भी दर्ज है। उन्होंने पहली पारी में अपनी टीम के लिए 69 प्रतिशत रनों का योगदान दिया जिसे आज तक कोई तोड़ नहीं सका है।
महज चार दिन ही चला था पहला टेस्ट मैच
क्रिकेट वर्ल्ड के लिए आज का दिन ऐतिहासिक था लेकिन यह मैच महज चार दिन ही चल सका। 15-17 मार्च तक मैच खेलने के बाद चौथे दिन के खेल से पहले रेस्ट डे था और दोनों टीमों ने आराम किया।
ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया। मेजबान टीम की ओर से सलामी बल्लेबाज चार्ल्स बर्नेमन ने टेस्ट मैच का पहला गेंद खेला और इसे ऐतिहासिक बनाते हुए शानदार शतक भी लगाया। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें किसी अन्य बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। वह 165 रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट हुए। अन्य बल्लेबाजों में ट्रेंट गैरेट (नाबाद 18) ने बर्नेमन के बाद दूसरी सबसे बड़ी पारी खेली। इंग्लैंड के एल्फर्ड शॉ को टेस्ट क्रिकेट में पहला गेंद डालने का श्रेय मिला।
जवाब में इंग्लैंड की पूरी टीम 196 रन बनाकर आउट हो गई। इंग्लैंड की ओर से भी पहला गेंद खेलने वाले ओपनर हैरी जॅप (63) ने सर्वाधिक पारी खेली।
टॉम के 7 विकेटों के आगे ढह गया इंग्लैंड
पहली पारी के आधार पर 49 रनों की बढ़त हासिल करने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी शुरू की लेकिन इस बार कंगारू टीम कमाल नहीं दिखा सकी।
68 ओवर खेलने के साथ ऑस्ट्रेलिया 104 रन बनाकर आउट हो गया। 154 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और खाता खोले बगैर ही पहला विकेट गंवा दिया।
इसके बाद इंग्लैंड लगातार संघर्ष करता रहा और पूरी टीम 66.1 ओवर में 108 रन बनाकर आउट हो गई। टॉम केंडेल ने दूसरी पारी में सात विकेट लिए। जबकि दोनों टीमों की ओर से एक-एक गेंदबाज ने 5-5 विकेट भी झटके थे।
तीसरे दिन आए सबसे ज्यादा दर्शक
क्रिकेट वर्ल्ड के इस ऐतिहासिक मैच को लेकर दर्शकों में भी खासा रोमांच रहा। टेस्ट मैच के पहले दिन 4500 दर्शक इसके गवाह बने।
दूसरे दिन चार हजार दर्शक मैच देखने मैदान आए। लेकिन सबसे ज्यादा तीसरे दिन आए। इस दिन दर्शकों की संख्या लगभग 10 हजार थी।
हालांकि मैच के अंतिम दिन जिस दिन परिणाम निकला दर्शकों की संख्या सबसे कम महज दो हजार थी। दर्शक यह सोचकर इस दिन इसलिए नहीं आए कि ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी जारी है और मैच अभी लंबा खींचेगा। लेकिन ट्रेंट केंडेल के सात विकेटों ने टाइमलेस मैच को चौथे दिन ही खत्म करा दिया।