आलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी ने वो सपना आखिरकार पूरा कर लिया जो क्रिकेट इतिहास में कभी-कभार ही बनता है।
अपने सपने को पूरा करने में उन्हें 30 साल लग गए। साल 2014 अब तक भले ही टीम इंडिया के लिए शानदार साबित न हुआ हो लेकिन स्टुअर्ट बिन्नी के लिए यह साल स्वर्णिम साल जैसा बनता जा रहा है।
इसी साल की शुरुआत में उन्होंने वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था। और इसके बाद बांग्लादेश में तीन मैचों की सीरीज के दूसरे मैच में महज 4 रन देकर 6 विकेट झटककर वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे खतरनाक गेंदबाज का दर्जा भी हासिल कर लिया। और अब उन्होंने अपने 30वें जन्म दिन के 6 दिन बाद दो और बड़ी सफलता हासिल की है।
भारत के 281वें टेस्ट खिलाड़ी
ऑलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी इंग्लैंड के खिलाफ बुधवार से ट्रेंट ब्रिज में शुरू हुए पहले टेस्ट में पदार्पण करने के साथ ही भारत के 281वें टेस्ट खिलाड़ी बन गए हैं। 30 वर्षीय बिन्नी ने इंग्लैंड दौरे में दो अभ्यास मैचों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था।
इससे पहले बिन्नी ने बांग्लादेश के खिलाफ जून में ढाका में दूसरे वनडे मैच में घातक गेंदबाजी करते हुए मात्र 4 रन पर 6 विकेट लेकर भारत को सीरीज जीताई थी। बिन्नी का भारत की ओर से वनडे में यह सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन था।
बिन्नी ने टेस्ट पदार्पण करने से पहले 4 वनडे खेले हैं। वहीं, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 55 मैचों में 2924 रन बनाने के अलावा 82 विकेट ले चुके बिन्नी ने डर्बीशायर के खिलाफ पिछले अभ्यास मैच में नाबाद 81 रन और दोनों पारियों में एक-एक विकेट झटके थे।
पिता-पुत्रों की 10वीं भारतीय जोड़ी
पहली बार टेस्ट कैप पहनने का मौका पाने वाले स्टुअर्ट बिन्नी टीम इंडिया की सफेद जर्सी पहनने वाले पिता-पुत्रों की 10वीं जोड़ी बन गई है। उनके पिता रोजर बिन्नी भी भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं। वर्तमान में वह चयनकर्ता समिति में शामिल भी हैं।
टेस्ट क्रिकेट खेलने वालों में रोजर और स्टुअर्ट बिन्नी से पहले भारत में 9 पिता-पुत्र टेस्ट मैच खेल चुके हैं। बिन्नी से पहले योगराज और युवराज सिंह टेस्ट क्रिकेट खेलने वाली पिता-पुत्रों की आखिरी जोड़ी थी।
इन 10 जोड़ियों में से एक जोड़ी ऐसी भी है जिसमें एक पिता और उनके 2 बेटों को टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला। पिता लाला अमरनाथ और उनके 2 पुत्रों मोहिंदर और सुरिंदर अमरनाथ की पिता-पुत्र जोड़ी ने इतिहास बनाया था।
भारत की सबसे तेज शुरुआत
पिछली 2 सीरीज में हार के बाद पहला टेस्ट मैच खेलने उतरी टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया, जिसे ओपनर मुरली विजय ने पहले ही ओवर में सही साबित कर दिया।
उन्होंने पहले ही ओवर में जेम्स एंडरसन पर लगातार तीन चौके जड़कर भारत की जोरदार शुरुआत दिलाई। पहले ओवर में बनाए गए रन के हिसाब से यह 2001 के बाद टेस्ट इतिहास की तीसरी सबसे तेज शुरुआत है। इसी साल वेस्टइंडीज ने बांग्लादेश के खिलाफ शुरुआती ओवर में 18 रन ठोके थे।
जहां तक इंग्लैंड में सबसे तेज शुरुआत की बात है तो 1969 में पहली बार वेस्टइंडीज के गैरी सोबर्स ने ज्यॉफ बॉयकाट पर पहले ही ओवर में 12 रन बनाए थे।
पहले ही घंटे में पूरा किया 'अर्धशतक'
भारतीय पारी की शुरुआत मुरली विजय और शिखर धवन ने की लेकिन अभी 33 रन ही जुटे थे कि धवन जेम्स एंडरसन की गेंद के शिकार हो गए और कैच आउट हो गए।
लॉर्ड्स में 2011 में खेले गए टेस्ट मैच के बाद भारत की सलामी जोड़ी एक भी पारी में अर्धशतकीय शुरुआत करने में नाकाम रही थी। बाएं हाथ के बल्लेबाज धवन को एंडरसन ने आउट किया।
इसके साथ ही ट्रेंट ब्रिज मैदान पर 17.5 की औसत से एंडरसन ने विकेटों का अपना अर्धशतक पूरा किया। पुजारा को आउट करने के साथ ही उनके विकेटों की संख्या 51 हो गई है। इंग्लैंड की ओर यह बेस्ट प्रदर्शन है।
2009 के बाद एंडरसन ने 89 विकेट झटके हैं जिसमें 26 बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं।