लंबे समय से खेल नीति का इंतजार कर रहे उत्तराखंड के खिलाड़ियों का सपना नए साल में पूरा होने की उम्मीद है। विभाग ने खेल नीति तैयार कर ली है, बस अब कैबिनेट की मुहर का इंतजार है।
2015 में अस्तित्व में आ जाएगी खेल नीति
विभाग ने खेल नीति बनाने के लिए हरियाणा और पंजाब के मॉडल को अपनाया है। हालांकि पुरस्कार राशि हरियाणा और पंजाब की अपेक्षा कम है, लेकिन खिलाड़ियों को नौकरी दिए जाने का प्रावधान नीति में रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2015 में प्रदेश की खेल नीति अस्तित्व में आ जाएगी।
नौकरी, सुविधाएं और आय के स्रोत नहीं होने के कारण 14 सालों में राज्य के कई उदीयमान खिलाड़ी दूसरे राज्य या केंद्रीय संस्थानों का रुख कर चुके हैं। उत्तराखंड के मूल निवासी होने के बावजूद दूसरे राज्यों का मान बढ़ा रहे हैं। इसका कारण उत्तराखंड की अपनी कोई खेल नीति नहीं होना है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की पहल के बाद खेल नीति अस्तित्व में आने की तैयारी में हैं। सूत्रों की मानें तो खेल नीति को कैबिनेट बैठक में रखने से पहले मंत्रियों के पास अवलोकन के लिए भेजा गया है।
ओलंपिक में स्वर्ण विजेता को डेढ़ करोड़
सूत्रों के अनुसार, खेल नीति में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने पर नगद पुरस्कार और नौकरी को प्रमुखता दी गई है। विभाग ने अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को पुलिस और खेल विभाग में नौकरी देने की योजना बनायी है।
वहीं ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण विजेता को डेढ़ करोड़, रजत विजेता को 1 करोड़ और कांस्य विजेता को 75 लाख रुपए दिए जाने की योजना है, जबकि प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ी को पांच लाख रुपए दिए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता भूतपूर्व को पेंशन और नए खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान भी नीति में है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को टिकट में छूट देने सहित अन्य योजनाओं का भी प्रावधान है।
यह नौकरी मिल सकती है
ओलंपिक व वर्ल्ड कप में पदक विजेता- क्लास-1 या श्रेणी क
कॉमनवेल्थ, एफ्रो-एशियन, एशियन गेम्स के पदक विजेता- क्लास-2 या श्रेणी ख
अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के पदक विजेता- क्लास-3 या श्रेणी ख