फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्पोर्ट्स बिल संशोधित कराने खेल मंत्री के समक्ष आईओए

Thu, 01 Jan 2015 10:43 PM IST
हेमंत रस्तोगी/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के अधिकारियों ने एकजुट होकर स्पोर्ट्स बिल में संशोधन कराने को कमर कस ली है। आईओए ने निर्णय लिया है कि वह बिल के विवादास्पद आयु व कार्यकाल नियम को नहीं मानेगी। इस नियम के कारण ही देश को सरिता  देवी जैसे मामलों का मुंह देखना पड़ रहा है।
विज्ञापन


आईओए अधिकारियों ने इस संबंध में खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल से एक नहीं बल्कि तीन बार मुलाकात भी कर ली है। हालांकि खेल मंत्री ने आईओए से वादा तो नहीं किया है, लेकिन आश्वासन जरूर दिया है कि वह कुछ सकारात्मक कदम जरूर उठाएंगे। अगर खेल मंत्री ने उनकी गुहार नहीं सुनी तो आईओए ने सुप्रीम कोर्ट में भी शरण लेने का मन बना लिया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्पोर्ट्स बिल को एक तरह से वैधता मिल गई है। खेल मंत्रालय ने कड़ाई से इसे आईओए समेत सभी खेल संघों पर लागू किया है। यहां तक बिल को नहीं मानने का मामला आईओसी के पास पहुंच गया था। चारों ओर के दबाव और पड़ी फूट के चलते ही आईओए ने अपने संविधान में संशोधन कर स्पोर्ट्स बिल को अपनाया था।
विज्ञापन


लेकिन अब सब कुछ सामान्य होने के बाद निर्णय लिया गया है आईओए आयु व कार्यकाल नियम को नहीं मानेगी। आईओए ने खेल मंत्री के समक्ष तर्क दिया है कि पूरी दुनिया में कहीं भी सेक्रेटरी जनरल के दो कार्यकाल (आठ साल) और उसके बाद अध्यक्ष बनने के लिए चार साल का कूलिंग पीरियड नहीं है। इंटरनेशनल फेडरेशन की कार्यकारिणी में जगह बनाने के लिए ही आठ साल सेक्रेटरी होना जरूरी है।

इस नियम के चलते देश के पदाधिकारी अपनी इंटरनेशनल फेडरेशनों में जगह नहीं बना पा रहे हैं। आईबा की कार्यकारिणी में नहीं होने के चलते सरिता देवी जैसे मामला पेचीदा हुआ। भारत का अधिकारी होने पर इतनी कठिनाई नहीं उठानी पड़ती। आईओए के सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता का कहना है कि खेल मंत्री ने उनकी चिंता को समझा है उन्हें सकारात्मक निर्णय का आश्वासन भी दिया है।

पहले ही स्पोर्ट्स बिल स्वीकार करने की बात पर उन्होंने कहा कि आईओए ने इसे दबाव में स्वीकार किया था। वापस इसे हाउस में रखकर संशोधित रूप में रखा जाएगा। वहीं खेल मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि स्पोर्ट्स बिल में संशोधन आसान नहीं है। इस पर हाईकोर्ट का आदेश आ चुका है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें