जिन हाथों से कभी बैग उठाकर कैडी का काम किया था, आज वहीं हाथ खिलाड़ियों को गोल्फर की ट्रेनिंग दे रहे हैं। हम बात कर रहे हैं गांव किशनगढ़ निवासी महेश कुमार की।
उन्होंने अपने बलबूते पर कैडी से कोच तक का सफर तय किया है। बुलंद इरादों से महेश कुमार ने यह साबित कर दिखाया।
महेश ने बताया कि उन्हीं के गांव के हरेंद्र गुप्ता पहले कैडी का काम करते थे, अब वे प्रोफेशनल गोल्फर हैं। महेश ने उनके साथ चंडीगढ़ गोल्फ क्लब जाना शुरू किया था। वहां वे कैडी का काम करने लगे।
गोल्फ क्लब में कैडी का काम करते-करते महेश की गोल्फ में रुचि होने लगी। प्रोफेशनल गोल्फर्स के साथ कैडी की भूमिका निभाते हुए महेश को भी गोल्फ की तमाम जानकारी हो गई।
इसके बाद रुपये इकट्ठे किए और गोल्फ की स्टिक खरीदकर अभ्यास शुरू किया। चंडीगढ़ गोल्फ क्लब से मदद मिली और टूर्नामेंट में हिस्सा लेना शुरू करते हुए प्रोफेशनल गोल्फर बन गए।
इसके बाद महेश ने जूनियर कोचिंग का कोर्स कर कोच बनने की ठान ली। कोचिंग के लिए पुणे में कोर्स में हिस्सा ले लिया। सी लेवल के बाद बी लेवल का कोचिंग कोर्स शुरू करना था, लेकिन भाषा बाधक बन गई।
कोर्स के लिए इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स किया
बी लेवल का कोर्स में जब भाषा बाधक बनी तो महेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने इंग्लिश स्पीकिंग की क्लास लगानी शुरू कर दीं।
शुरुआत में दिक्कतें आईं लेकिन महेश ने उन्हें भी दूर कर दिया। भाषा की बाधा दूर होने के बाद उन्होंने 2010 में ए कलास का कोर्स भी पूरा किया।
अब ए क्लास कोच
महेश अब चंडीगढ़ गोल्फ रेंज (सीजीए) में ए क्लास के प्रोफेशनल कोच हैं। यहां वे युवा खिलाड़ियों के हुनर को तराश रहे हैं।