जुर्म के खिलाफ सिखों की जो मार्शल फौज गुरू गोबिंद सिंह ने तैयार की थी वह अब एक कला बन चुकी है। यह है गतका यानी सिख मार्शल आर्ट।
वह भी ऐसी जिसने अपनी पैठ देश और विदेशों में भी बना डाली है। शहर में कई जगह गतका एकेडमी में गतका खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का परिचय देने में जुटते हैं।
सेक्टर 34 स्थित गुरुद्वारा साहिब में गतका एकेडमी में रोजाना कई गतका खिलाड़ी पहुंचकर अभ्यास में जुट जाते हैं। एकेडमी के डॉयरेक्टर कुलजीत सिंह जोकि शिरोमणि गतका फेडरेशन ऑफ इंडिया के उप प्रधान भी हैं, उन्होंने बताया कि सिखों की पारंपरिक खेल को वह आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
इनकी एकेडमी में 5 साल से लेकर 45 आयु वर्ग के गतका खिलाड़ी हैं। मार्शल आर्ट की तरह खेले जाने वाले इस खेल की घूम देश में नही विदेशों में भी हैं। वह खुद अपनी एकेडमी के सदस्यों को कई बार विदेशों में लेकर गए हैं।
उन्होंने कहा कि गतका का क्रेज दिन प्रतिदिन बढ़ता चला आ रहा है। खुद परिवार वाले छोटी उम्र से ही अपने बच्चों को एकेडमी में ला रहे है। इनके यहां गतका सीखने केलिए किसी तरह की फीस नहीं ली जाती।
रोशनी नहीं लेकिन हौसला फिर भी कायम
एकेडमी में अभ्यास कर रही रशपाल कौर की चुस्ती फुर्ती ऐसी कि कोई भी उनके आगे देर तक नहीं टिकता। 2005 में अपनी आंखों की रोशनी खो चुकी रशपाल कौर के हौसले आज भी कम नहीं हुए हैं।
गतके में बेहतरीन प्रदर्शन करने के दम पर रशपाल कौर को इंग्लैंड में स्पोर्ट्स कोटे से सिख डायरेक्टरी अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
रशपाल कौर ने बताया कि वह इस कला को अधिक से अधिक लड़कियों को सीखना चाहती हैं, जिससे कि वह निडर होकर कही भी आ जा सके। गतका में कृपाण, सोटी, ढाल, नागनी, बरछा, तूफानी गोला, तलवारबाजी,खंजर, जाल खेले जाते हैं।