वेतन 86 रुपए प्रतिदिन, काम : रोजाना 12 घंटे खिलाड़ियों, कोच के लिए खाना बनाना और कार्यालय आने वाले लोगों के काम करना, वह भी महीने में बिना छुट्टी लिए।
यह उदाहरण है देहरादून स्थित जिला खेल कार्यालय में तैनात एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी का। इसे सितम नहीं तो और क्या कहेंगे... यह कहना इसलिए भी सही है क्योंकि एक ओर मनरेगा के तहत मजदूरी करने वाले लोगों को 8 घंटे काम करने के बदले 154 रुपए मजदूरी मिलती है।
जबकि दिहाड़ी करने वाले मजदूर भी इतने ही समय काम के बदले 300 से 400 रुपए तक लेते हैं। इसके अलावा खेल कार्यालय में ही तैनात पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) कर्मियों को आठ से 10 हजार रुपए मानदेय मिल रहा है।
छुट्टी का वेतन नहीं, पर काम की जिम्मेदारी
विभागीय अधिकारियों की मानें तो 100 रुपए प्रतिदिन मानदेय देने का वित्त विभाग का शासनादेश है। इस हिसाब से खेल कार्यालय में तैनात इस कर्मचारी को 2600 रुपए प्रतिमाह मिलता है। विभाग की मानें तो छुट्टियों का वेतन नहीं दिया जाता, लेकिन हॉस्टल में 30 दिन खाना बनाने की जिम्मेदारी इसी कर्मचारी की है। ऐसे में इस कर्मचारी का प्रतिदिन का मानदेय 86 रुपये बनता है।
86 रुपए रोजाना में इतने काम
जिला खेल कार्यालय के अंतर्गत परेड ग्राउंड में संचालित फुटबाल हॉस्टल में तैनात यह दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हॉस्टल में रहने वाले करीब 20 खिलाड़ियों और एक कोच के लिए तीनों वक्त खाना बनाता है। इसके अलावा खेल कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों, अधिकारियों की सेवा भी करनी पड़ती है।
सूत्रों के अनुसार, विभाग के ही कई स्थायी कर्मचारी दिनभर इस कर्मचारी को काम के लिए बुलाते रहते हैं। यह सिलसिला इस कर्मचारी की तैनाती यानी करीब डेढ़ साल से बदस्तूर चल रहा है।
उत्तर प्रदेश में कुक की है पोस्ट
उत्तर प्रदेश में भी खेल हॉस्टलों का संचालन कोऑपरेटिव मेस समिति ही करती है। सूत्रों के अनुसार, वहां हॉस्टल के लिए कुक की पोस्ट रखी गई है। इसी के आधार पर नियुक्ति भी होती है या फिर संविदा पर कर्मचारी रखे जाते हैं।
दैनिक वेतनभोगी के मानदेय को बढ़ाने संबंधी फाइल शासन को भेजी थी। इस पर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। मानदेय काफी कम है, इसलिए अब दूसरे सोर्स से वेतन बढ़ाने की व्यवस्था करने की व्यवस्था कराई जाएगी।
- अजय अग्रवाल, उप निदेशक खेल