उत्तराखंड में भूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए शुरू होने वाली पेंशन योजना के लागू होने से पहले ही रोड़े अटकने लगे हैं।
खेल प्रतियोगिताओं को एक वर्ग में शामिल करने पर कई पूर्व खिलाड़ियों ने ऐतराज जताया है। इसके बाद खेल विभाग ने आपत्तियों को देखते हुए इसका निस्तारण करने की कोशिश शुरू कर दी है।
वर्ष 2013 में खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने राज्य के भूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए पेंशन योजना शुरू करने की घोषणा की थी। जिसके जनवरी 2014 से शुरू करने की बात कही गई थी। मगर बीते साल पेंशन योजना में आयु सीमा और आय के मुद्दे पर खेल विभाग स्थिति साफ नहीं कर सका।
वहीं खेल नीति लागू होने के बाद खेल विभाग ने अप्रैल 2015 से इसे लागू करने की योजना बनाई थी। जिसमें दो श्रेणियों में पेंशन दिए जाने का प्रस्ताव पास किया गया। मगर कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं को एक साथ रखे जाने पर आपत्ति जता दी।
विभाग के अनुसार खिलाड़ियों का कहना है कि एशियन गेम्स और सैफ गेम्स को एक श्रेणी में रखा जाना सही नहीं है। ऐसी ही अन्य आपत्तियां भी हैं। जिस कारण योजना शुरू नहीं हो सकी है। उप निदेशक अजय अग्रवाल ने बताया कि आपत्तियां आने के कारण योजना तय समय पर शुरू नहीं हो सकी है।
विभाग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ अन्य श्रेणियां बनाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही भारत सरकार की ओर से भूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को दी जाने वाली पेंशन योजना का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद योजना में कुछ परिवर्तन किए जा सकेंगे।