भारत के शीर्ष टेनिस खिलाड़ियों ने आगामी एशियन गेम्स से अपना नाम वापस ले लिया है। भले ही खिलाड़ियों के इस फैसले के बाद उनकी राष्ट्र भावना पर सवाल उठने लगे हों लेकिन खिलाड़ियों ने इस फैसले के पीछे अपने अंतरराष्ट्रीय कैरियर का हवाला दिया है।
एशियन गेम्स के दौरान कई एटीपी और डब्लूटीए टूर्नामेंट का कार्यक्रम टकराने के चलते सबसे पहले देश के नंबर वन खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने अपना नाम वापस लिया था।
बाद में दिग्गज लिएंडर पेस और रोहन बोपन्ना ने भी बुधवार को अपना नाम वापस ले लिया। सानिया मिर्जा ने फैसला ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (एआईटीए) पर फैसला छोड़कर संकेत दे चुकी हैं कि वह भी खेलने की इच्छुक नहीं हैं।
अपने फैसले से अवगत कराते हुए 41 वर्षीय पेस ने कहा, ‘टेनिस ही मेरे लिए सब कुछ है। दो दिन पहले मेरी रैंकिंग गिरकर 35वें पर पहुंच गई है। मुझे यह भी सुनिश्चित करना है कि अगले साल खेलूं। इस साल अभी कुआलालंपुर और टोक्यो में खेलना है जिसका कार्यक्रम एशियन गेम्स से टकरा रहा है।
हालांकि मेरे लिए देश हमेशा सर्वोपरि रहा है। अगर ऐसा नहीं होता तो मैं 24 साल से नहीं खेल रहा होता। मैंने हमेशा अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। कैरियर के लिहाज से मुझे कुआलालंपुर और टोक्यो को प्राथमिकता देना पड़ रहा है।’
बोपन्ना ने भी पेस से सहमति जताते हुए कहा कि उनके लिए यह फैसला कर पाना आसान नहीं था। बकौल बोपन्ना, ‘हम एशियाई खिलाड़ी इसमें खेलने के लिए बेताब रहते हैं।
जैसा कि ली ने कहा, यह साल हमारे लिए आसान नहीं रहा। मैंने पिछले साल टोक्यो में जीता था इसलिए इस बार यह खिताब बरकरार रखना चाहता हूं। लिहाजा मुझे एशियन गेम्स से हटने का फैसला करना पड़ा।
हालांकि हमें भविष्य में जब कभी भी देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए कहा जाएगा हम तैयार रहेंगे।’