पहले मेजबान अमेरिका की मुक्केबाज एन हडसन और फिर इंग्लैंड की रासेल बॉवर....उत्तराखंड की कमला बिष्ट के पंचों का दोनों के पास कोई जवाब नहीं रहा। पिथौरागढ़ जिले की निवासी कमला बिष्ट ने अमेरिका में स्वर्णिम इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश और उत्तराखंड का झंडा बुलंद किया है।
लंदन पुलिस की रासेल बॉवर को चटाई धूल
अमेरिका के वर्जीनिया में 25 जून से शुरू हुए फेयर फैक्स वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स में उत्तराखंड की निगाहें अपनी महिला मुक्केबाज कमला बिष्ट पर थीं। शनिवार सुबह करीब 5 बजे (भारतीय समय के अनुसार) का 57 किलोग्राम भार वर्ग का फाइनल मुकाबला लंदन पुलिस की रासेल बॉवर के साथ हुआ।
कमला बिष्ट ने शुरुआती राउंड से बढ़त बनानी हासिल कर ली और एकतरफा मुकाबले में 3-0 से जीत दर्ज की भारत की झोली में एक स्वर्ण और डाला। जबकि उत्तराखंड पुलिस के खाते में यह छठा गोल्ड मेडल आया है।
कोच को दिया जीत का श्रेय
मूल रूप से पिथौरागढ़ की रहने वाली कमला ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि उनकी जीत का श्रेय उनके कोच पिथौरागढ़ निवासी किशन सिंह महर को जाता है। कमला ने कहा कि किशन सिंह महर ने ही 2003 में उनको बॉक्सिंग खेलने के लिए प्रेरित किया था और गलब्ज पहनाए थे। हर मैच से पहले उन्होंने उसे हौसला दिया और जीत का रास्ता खोला।
कमला बिष्ट के कोच किशन सिंह महर ने बताया कि यह कमला की मेहनत का नजीता है, जो उसने यह खिताब जीता है। वह सुबह और शाम सबसे अधिक मेहनत करती है और फिट भी है।
बता दें कि 2007 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कमला ने पहला स्वर्ण पदक जीता। 2009 में फेडरेशन कप में कमला से सोना जीता और 2009, 2013, 2014 में भी कमला ने ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में बॉक्सिंग का स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं। 2012 में रजत और 2010, 2011 में कांस्य पदक जीता।