ग्लासगो में चल रहे कामनवेल्थ गेम्स में भारतीय हाकी टीम में शामिल हरिद्वार की वंदना कटारिया पर शहर के लोगों की ही नहीं बल्कि पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
कनाडा को धूल चटाने के बाद भारतीय टीम की सफलता और वंदना के बेहतर प्रदर्शन के लिए परिजन प्रार्थना कर रहे हैं।
वर्ष 2006 में राष्ट्रीय महिला हाकी टीम में शामिल हुई वंदना ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैचों में कई पदक हासिल किए। घाड़ क्षेत्र के रोशनाबाद गांव में सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली वंदना के पिता नाहर सिंह ने कर्ज लेकर बेटी को खेलने के लिए भेजा था।
बेटी के शर्ट पैंट पहनने पर गांववालों के ताने सहे। लेकिन पिता ने परवाह नहीं की और बेटी भारतीय राष्ट्रीय हाकी टीम का हिस्सा बन ग्लासगो में चल रहे कामनवेल्थ गेम्स में खेलने पहुंच गई।
ग्लासगो में खेला 100वीं अंतरराष्ट्रीय मैच
वंदना के कोच कृष्ण कुमार ने बताया कि वंदना का परिवार और रिश्तेदार भारतीय हाकी टीम की जीत के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
कोच कृष्ण कुमार ने बताया कि वंदना फारवर्ड लाइन पर खेलती है और अटैकर हैं। ग्लासगो में वंदना ने 100वां अंतरराष्ट्रीय हाकी मैच खेला है।
कनाडा को 3-1 से हराकर जीत के साथ यह उपलब्धि वंदना के खाते में जुड़ी है। इस अवसर पर फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल हाकी (एफआईएच) की ओर से वंदना को सम्मानित किया है।
अब तक की उपलब्धियां
- वंदना पहली बार वर्ष 2007 में देश से बाहर इटली में आयोजित हाकी प्रतियोगिता में खेलने गई और रजत पदक जीता।
- वर्ष 2008 में मलेशिया में आयोजित एशिया कप में कांस्य पदक और 2009 में रूस में फर्स्ट चैंपियंस चैलेंज प्रतियोगिता में स्वर्ण झटकने में कामयाबी पाई।
- वर्ष 2009 में सिडनी में हुई आस्ट्रेलियन यूथ ओलंपिक फेस्टीवल में कांस्य पदक देश की झोली में डाला।
- वर्ष 2012 में थाईलैंड बैंकाक में आयोजित एशिया कप में रजत और 2013 में दिल्ली में वर्ल्ड लीग में स्वर्ण मिला।
- जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड कप वर्ष 2013 में कांस्य पर कब्जा किया। इसी साल मलेशिया में एशिया कप में कांस्य और जापान में एशियन चैलेंज ट्राफी में रजत हासिल किया।
- वर्ष 2014 में मलेशिया में आयोजित सिक्स्थ मैच टेस्ट सीरीज में स्वर्ण प्राप्त करने में सफलता पाई।