आईसीसी ने एक ऐसी योजना तैयार की है जिससे भविष्य में क्रिकेट का नक्शा ही बदल जाएगा और नई टीमें भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों को चुनौती दे सकेंगी।
अब तक माना जा रहा था कि आईसीसी के पुरानों नियमों की वजह से क्रिकेट जगत में नई टीमों को पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है और इस कारण से नई टीमें आगे नहीं आ पा रही हैं।
लेकिन मैदान पर बड़ी टीमों को हराकर उलटफेर करने में माहिर आयरलैंड और नीदरलैंड जैसी टीमों को अब ऐसे मौके का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
ICC ने तैयार की अपनी महत्वाकांक्षी योजना
आईसीसी ने टेस्ट क्रिकेट में नई टीमों को शामिल करने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजना तैयार कर ली है। अब उसने एसोसिएट सदस्य देशों को टेस्ट दर्जा हासिल करने के लिए ‘आईसीसी टेस्ट चैलेंज’ को मंजूरी दे दी है।
चैलेंज के तहत हर चार साल में सबसे निचली रैंकिंग वाली टीम और आईसीसी इंटर कांटिनेंटल कप की विजेता टीम के बीच मुकाबला होगा।
दुबई में आईसीसी की कार्यकारी समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया।
बांग्लादेश और जिम्बाब्वे के लिए बड़ी चुनौती
आईसीसी के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि मौजूदा समय में सबसे निचली रैंकिंग वाली टीम बांग्लादेश और जिम्बाब्वे को नीदरलैंड, आयरलैंड और यूएई से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
आईसीसी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, "आईसीसी बोर्ड ने आईसीसी टेस्ट चैलेंज को मंजूरी दे दी है जो हर चार साल में टेस्ट रैंकिंग की सबसे निचली टीम और आईसीसी इंटर कांटिनेंटल कप की विजेता टीम के बीच होगी।"
प्रस्ताव के मुताबिक 31 दिसंबर 2017 को या उस समय चल रही किसी सीरीज के समाप्ति के बाद जो टीम रैंकिंग में 10वें स्थान पर होगी वह अपनी धरती और फिर विदेशी धरती पर दो-दो टेस्ट मैच इंटर कांटिनेंटल कप की विजेता टीम से खेलेगी।
आयरलैंड और डच जैसी टीम को मिलेगा फायदा
अपने तरहे का यह अनोखा टेस्ट चैलेंज 2018 में खेला जाएगा।
अगले आठ साल में आईसीसी की दो इंटर कांटिनेंटल कप टूर्नामेंट कराने की योजना है जिसमें पहला 2015 से 2017 के बीच और दूसरा 2019 से 2021 के बीच आयोजित होगा।
जबकि आईसीसी टेस्ट चैलेंज का दूसरा संस्करण 2022 में खेला जाना है। इंटर कांटिनेंटल कप में 2004 से आयरलैंड का दबदबा रहा है और चार बार यह खिताब जीत चुका है। जबकि अफगानिस्तान और स्कॉटलैंड एक-एक बार खिताब जीतने में सफल रहा है। इस नई योजना से आयरलैंड जैसी उभरती टीम को फायदा मिलेगा।