फुटबॉल खिलाड़ियों को ‘किक’ मारने वाले (ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले) वयोवृद्ध फुटबॉल कोच मो. इदरीश बाबा अब आर्थिक मोर्चे पर कमजोर पड़ने लगे हैं।
बावजूद इसके पिछले 40 साल से वह अब भी फुटबॉल खिलाड़ियों को तराश रहे हैं। 75 साल की आयु में भी बाबा का जज्बा कम नहीं हुआ है। बाबा के प्रयासों से ही क्षेत्र के 12 से अधिक खिलाड़ी फुटबॉल की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचे हैं।
जबकि कई फौज अथवा अन्य विभागों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं, लेकिन बाबा को सम्मानित करने के लिए किसी ने भी हाथ आगे नहीं बढ़ाया। फुटबाल प्रेमियों की ओर से उन्हें सम्मानित करने की मांग उठने लगी है।
वयोवृद्ध फुटबाल कोच मो. इदरीश बाबा ने युवाओं का कॅरिअर बनाने के लिए शादी तक नहीं की। आज भी वह जरूरी बाजार स्थित अपने पुश्तैनी मकान में अकेले फटेहाल जिंदगी बसर कर रहे हैं। बाबा की दिनचर्या फुटबॉल से शुरू होकर फुटबॉल में ही खत्म हो जाती है।
नगर में मैदान नहीं बनने की स्थिति में बाबा और उनके शिष्यों ने राजपुरा मैदान को विकसित किया और खेलने योग्य बनाया। हाथ में सीटी लेकर वह युवाओं को गोल बनाने का मौका, गोल करना, पास देना और खेल भावना की सीख देते हैं। उनके पास वर्तमान में 40 से अधिक युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। इधर जिला व्यापार संघ, सुभाष विचार मंच, छावनी सभासदों, पत्रकार संगठनों से जुड़े लोगों ने उन्हें सम्मानित करने की मांग की है।
इन खिलाड़ियों को पहुंचा चुके हैं नेशनल स्तर तक
पुष्कर अधिकारी उर्फ मधु (यूनिवर्सिटी और नेशनल), प्रताप सिंह बिष्ट (नेशनल), दिनेश भैसोड़ा (नार्थ जोन), अब्दुल रिजवान (नेशनल), विशन सिंह बिष्ट (नेशनल), दिवान राणा (स्टेट), मान सिंह परमार (नेशनल), नरेंद्र पुरी (कमांड स्तर), मनोज भट्ट (नेशनल), नजीर खान (स्टेट), कुंदन सिंह (नेशनल), जतिन जुयाल (नेशनल), अमन कन्नोजिया (तीन बार नेशनल), पंकज अधिकारी (संतोष ट्राफी), त्रिभुवन असवाल (नेशनल), परमेश्वर कांडपाल (संतोष ट्राफी), राहुल वर्मा- दो बार नेशनल खेल चुके हैं।