भारत और न्यूजीलैंड के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच गुरुवार से ऑकलैंड के ईडन पार्क पर खेला जाएगा जहां टीम इंडिया ने कोई टेस्ट नहीं गंवाया है।
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न्यूजीलैंड की जमीन पर भारत ने जो पांच टेस्ट जीते हैं उनमें से दो बार उसे इसी मैदान पर जीत नसीब हुई है। टीम इंडिया ने ईडन पार्क में चार टेस्ट खेले हैं जिनमें से दो जीते हैं जबकि दो ड्रॉ रहे।
टीम इंडिया ने 1968 में न्यूजीलैंड को 272 रन से और 1976 में आठ विकेट से शिकस्त दी थी। 1981 और 1990 में दोनों टीमों के बीच यहां खेले गए टेस्ट ड्रॉ रहे थे। यानी दोनों टीमें 24 साल बाद इस मैदान में आमने-सामने होंगी।
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ढाई साल से है पहली जीत का इंतजार
महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया को विदेशी धरती पर लगभग ढाई साल से एक भी टेस्ट मैच में जीत नहीं मिली है। भारत को अंतिम बार जून 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सबीना पार्क में जीत नसीब हुई थी। उसके बाद से टीम इंडिया ने विदेशी जमीन पर 12 टेस्ट खेले हैं और उसे एक भी जीत नसीब नहीं हुई है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन 12 में से नौ टेस्ट में भारत को हार का सामना करना पड़ा है। इस तरह विदेशी जमीन पर जीत-हार के अनुपात के मामले में भारत जिम्बाब्वे के साथ सबसे निचले पायदान पर है।
भारतीय बल्लेबाजों में केवल कप्तान धोनी को ही जबकि गेंदबाजों में जहीर खान और इशांत शर्मा को ही केवल न्यूजीलैंड में टेस्ट खेलने का अनुभव है।
यहां पर भी है रैंकिंग बचाने का दबाव
विदेशी सरजमीं पर लगातार दूसरा वनडे सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया अब लगातार चौथा टेस्ट सीरीज हारने से बचना चाहेगी। लेकिन इसके लिए भारतीय टीम को अपनी कमियों और आलोचनाओं को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर से जीत की पटरी पर लौटना होगा।
दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच ऑकलैंड में गुरुवार से भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े तीन बजे से शुरू होगा।
भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास है कि पहले तो वह विदेशी धरती पर हार का सिलसिला तोड़े। साथ ही यदि वह इस सीरीज को जीत लेती है या फिर ड्रॉ कराने में सफल रहती है तो वह टेस्ट रैंकिंग में दूसरे नंबर पर बनी रहेगी। लेकिन यदि वह इस बार भी नाकाम होती है तो वनडे में नंबर वन का ताज गंवा चुकी टीम इंडिया टेस्ट में भी नंबर दो की अपनी कुर्सी गंवा बैठेगी।
बल्लेबाजों पर होगा बड़ा दारोमदार
वनडे सीरीज में शर्मनाक हार के बाद दबाव में दिख रही टीम इंडिया मेजबान न्यूजीलैंड के बढ़े हुए हौंसले को पस्त करना चाहेगी। वनडे सीरीज में भारतीय टीम की हार का अहम कारण बल्लेबाजों का असफल होना रहा है।
ओपनर मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा न्यूजीलैंड की धरती पर इस दौरे पर पहली बार बल्लेबाजी करेंगे। हालांकि विराट कोहली और कप्तान धोनी को छोड़कर रोहित शर्मा, अंबाती रायडू, अजिंक्य रहाणे और शिखर धवन जैसे बल्लेबाज इस दौरे में फ्लॉप रहे थे। भारत चाहेगा कि टेस्ट सीरीज में बल्लेबाजी फ्लॉप न हो।
दो दिनी अभ्यास मैच में टीम के कमोबेश सभी बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज शिखर धवन अभी भी लय में नहीं लौटे हैं। अभ्यास मैच में वह महज 26 रन ही बना पाए थे। जबकि रोहित शर्मा, रहाणे और अंबाती रायडू ने फॉर्म वापसी के संकेत दे दिए हैं। आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए आर अश्विन ने 46 रनों की पारी खेली।
गेंदबाजी में भी लय हासिल करना होगा
वनडे सीरीज में भारतीय गेंदबाजों ने खूब रन लुटाए थे। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने इशांत शर्मा और भुवनेश्वर कुमार से काफी रन बटोरे। लेकिन टेस्ट सीरीज में अनुभवी जहीर खान और उमेश यादव की वापसी हुई है जिससे टीम इंडिया में मजबूती आने की संभावना है।
इन दोनों के अलावा उभरते तेज गेंदबाज ईश्वर पांडे को इस मैच से अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करने का मौका मिल सकता है।
वहीं वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने वाले मोहम्मद शमी से उम्मीद होगी कि वनडे मैचों वाला प्रदर्शन टेस्ट सीरीज में भी जारी रखें।
टेस्ट सीरीज से पहले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का कहना है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में उनके तेज गेंदबाजों को दक्षिण अफ्रीका दौरे की तरह लंबे स्पैल फेंकने के लिए तैयार रहना चाहिए। धोनी को मालूम है कि टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड की तेज पिचों पर स्पिनरों को कोई मदद मिलने की उम्मीद नहीं है
धोनी ने पहले टेस्ट से एक दिन पहले कहा, "दक्षिण अफ्रीका में हमारे तेज गेंदबाजों को लंबे स्पैल करने पडे थे और न्यूजीलैंड में भी उन्हें ऐसा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। अच्छी बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका में दिन के चौथे स्पैल में भी हमारे गेंदबाजों की ताजगी बरकरार रही और उन्होंने पूरे मनोयोग से गेंदबाजी की।"
दक्षिण अफ्रीका दौरे में दो मैचों में भारत के तेज गेंदबाजों को लगातार गेंदबाजी करना पड़ा था। जहीर खान, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा को जोहानिसबर्ग के वांडरर्स टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 91 ओवर गेंदबाजी करनी पड़ी थी। वहीं डरबन टेस्ट की पहली पारी में तेज गेंबाजों को 86 ओवर फेंकने पड़े थे।