महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया एक बार फिर इंग्लैंड की सरजमीं पर है और उसे 30 साल बाद पांच मैचों की बड़ी टेस्ट सीरीज खेल रही है। सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार से नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज में शुरू हो रहा है।
टीम इंडिया पर इस समय मनोवैज्ञानिक दबाव होगा क्योंकि विदेशी सरजमीं पर उसे अपनी पिछली दोनों टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी।
हालांकि मेजबान इंग्लैंड की स्थिति भी बहुत बढ़िया नहीं है। उसने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाई है। मेजबान टीम यह सीरीज बचाने की स्थिति में थी लेकिन मैच खत्म होने से एक गेंद पहले टीम के आउट हो जाने से न सिर्फ मैच में हार मिली बल्कि सीरीज से भी हाथ धो बैठे।
टीम इंडिया पर दोहरा दबाव
इंग्लैंड के पिछले दौरे में भारत (0-4) का टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप हो गया था। इस लिहाज से भारत पर दोहरा दबाव होगा। पहला यह कि वह इंग्लैंड में 2011 में मिली करारी हार का बदला चुकता करे। और दूसरा, इस मैच में जीत के जरिए लगातार तीसरी सीरीज में हार से बचने का रास्ता तलाशना भी होगा।
भारत ने दक्षिण अफ्रीका और फिर न्यूजीलैंड में लगातार सीरीज गंवाई जिसके बाद विदेशी मैदान पर उसकी फॉर्म को लेकर सवाल उठ खड़े हुए, तो दूसरी ओर इंग्लैंड ने इस वर्ष के शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया से 0-5 से एशेज सीरीज गंवाई तो गत माह उसे श्रीलंका ने दो टेस्टों की सीरीज में 1-0 से मात दे दी।
एक दिन पहले अपना 33वां जन्मदिन मनाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के लिए भी इंग्लैंड दौरा इस बार बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 1959 के बाद यह पहली बार है जब इंग्लैंड की मेजबानी में भारत 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेल रहा है।
इशांत के लिए अहम होगा मैच
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के संन्यास लेने के बाद विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन और आर अश्विन जैसे खिलाड़ियों की इस युवा टीम पर जीत की अपेक्षाओं का दबाव होगा, साथ ही अनुभव की कमी भी चुनौती होगी।
जहां तक भारतीय बल्लेबाजों का सवाल है तो कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर को ही इंग्लैंड में टेस्ट मैच खेलने का अनुभव है।
जबकि गेंदबाजों में सिर्फ तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा ही टीम में शामिल अकेले ऐसे भारतीय गेंदबाज हैं जिन्होंने इंग्लैंड में टेस्ट मैचों में गेंदबाजी की है। ट्रेंटब्रिज के जिस मैदान में पहला टेस्ट मैच होने जा रहा है उसे तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्ग माना जाता है। ऐसे में भारत के लिए अनुभवी ईशांत की अहम भूमिका होगी।