गलती खुद की और ठीकरा फोड़ रहे हैं खिलाड़ियों के सिर। पहले नेशनल इवेंट के लिए उत्तराखंड में कोई ट्रायल नहीं कराया। इसके बाद अंतिम तिथि तक टीम का पंजीकरण कराने से भी चूक गए।
अब बहाना बनाया जा रहा है कि स्वीमिंग पूल में सेंट्रल हीटिंग सिस्टम नहीं है। जिसके चलते खिलाड़ी केवल दो से तीन माह ही प्रैक्टिस कर पाए। लिहाजा उनकी टाइमिंग ऐसी नहीं है कि वे प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर पाएं।
जबकि एसोसिएशन पहले ट्रायल कराती, उसके बाद ही कोई फैसला लेती तो ठीक लगता। खिलाड़ियों का सवाल है कि 2018 के राष्ट्रीय खेलों के लिए एसोसिएशन क्या विदेश से खिलाड़ी लाएगी।
13 से 19 जुलाई तक पुणे (महाराष्ट्र) में 42वीं ग्लेनमार्क जूनियर नेशनल एक्वाटिक चैंपियनशिप का आयोजन होना है। प्रतियोगिता का आयोजन महाराष्ट्र स्टेट एक्यूटिक एसोसिएशन करा रही है। एसोसिएशन ने प्रतियोगिता में प्रवेश की अंतिम तिथि 15 जून तय की थी।
भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव और उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता के बयान से खिलाड़ियों में रोष है। उनका कहना है कि मेहता जी ने बगैर ट्रायल कराए यह कैसे कह दिया कि उनकी टाइमिंग अच्छी नहीं है। यदि खिलाड़ियों की टाइमिंग अच्छी नहीं थी तो हर साल टीम को नेशनल खेलने क्यों भेजा जाता था।
राष्ट्रीय खिलाड़ी मनोज जोशी का कहना है कि हर साल खिलाड़ी यहां इस उम्मीद के साथ प्रैक्टिस करते हैं कि उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा, लेकिन जब टीम को नहीं भेजा जाता है तो उनका मनोबल गिरता है। खेल प्रेमी देवेंद्र धपोला का कहना है कि उनका बेटा नेशनल प्लेयर है।
वह तीन से चार माह रेगुलर प्रैक्टिस करता है, लेकिन सेंट्रल हीटिंग सिस्टम न होने के कारण जाड़ों में प्रैक्टिस बंद हो जाती है। उनका कहना है कि यह किसकी जिम्मेदारी है कि स्वीमिंग पूल में सेंट्रल हीटिंग सिस्टम की व्यवस्था करे सरकार की या एसोसिएशन की।
जहां तक टाइमिंग की बात है तो हमारे खिलाड़ियों की टाइमिंग अन्य राज्यों के खिलाड़ियों से काफी बेहतर है। एक खिलाड़ी ने तल्ख अंदाज में कहा कि यदि टीम नहीं भेजनी है तो स्वीमिंग पुल पर बोर्ड लगा दें कि यहां से नेशनल के लिए कोई टीम नहीं भेजी जाएगी, सिर्फ आप यहां शौकिया तौर पर ही प्रैक्टिस कर सकते है। किस काम का ऐसा स्वीमिंग पूल।
स्वीमिंग पूल में सेंट्रल हीटिंग सिस्टम लगाने के लिए निर्माण एजेंसी को लिखा गया है। इसके अलावा कई अन्य प्रस्ताव है। जल्द ही इस पर कार्रवाई होगी।
- अख्तर अली, सहायक खेल निदेशक (कुमाऊं), हल्द्वानी