टी-20 क्रिकेट का फॉर्मेट जितना छोटा है, उसका रोमांच उतना ही ज्यादा। चौकों और छक्कों की बरसात यानी तीन घंटे का पूरा मनोरंजन। नौजवानों के साथ कदमताल करते उम्रदराज खिलाड़ी।
इस खेल में मैदान पर रणनीति से ज्यादा ऐन वक्त पर शतरंज जैसी तुरुप की चाल कामयाबी का सबब बन जाती है। अकेला बल्लेबाज एक ही ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से किसी भी चतुर कप्तान की रणनीति पर पानी फेर सकता है।
हीरो को जीरो और जीरो को हीरो बनाने के लिए एक ही ओवर काफी है।
एशियाई टीम जीत सकती है खिताब
अब तक हुए कुल चार टी-20 विश्व कप में भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमें एक-एक बार चैंपियन बनी हैं। बड़ा सवाल यह है कि 16 मार्च यानी रविवार से बांग्लादेश में शुरू हो रहे पाँचवें टी-20 विश्व कप में कोई नया विजेता मिलेगा या कोई पूर्व विजेता टीम ही खिताब जीतकर नया इतिहास रचेगी।
मौजूदा फॉर्म और भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों के मद्देनजर इस बार किसी एशियाई देश के विजेता बनने की संभावना अधिक है।
मौजूदा एशिया कप चैंपियन श्रीलंका, उपविजेता पाकिस्तान तो इस बार टी-20 विश्व कप में खिताब के दावेदार हैं ही, हाल के ढीले प्रदर्शन के बावजूद भारतीय टीम को भी नकारा नहीं जा सकता है। वैसे आईपीएल में खेलने के कारण विदेशी क्रिकेटर उपमहाद्वीप की पिचों को पूरी तरह जान गए हैं। ऐसे में अगर ये खिलाड़ी चल निकले तो कुछ भी हो सकता है।
धोनी को दिमाग से सोचना होगा
भारत की कप्तानी एक बार फिर धोनी के हाथ में है। वह लगातार पांचवीं बार टी-20 विश्व कप में भारत की कप्तानी करेंगे। धोनी की कप्तानी में ही भारत ने 2007 में जोहानिसबर्ग में पाकिस्तान को फाइनल में पाँच रनों से हराकर पहला टी-20 विश्व खिताब जीता था।
इस बार भारत अपने अभियान का आगाज 21 मार्च को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मैच से करेगा। धोनी ने भारत के लिए इस टूर्नामेंट में अब तक सबसे ज्यादा 22 मैच खेले हैं और 30 की औसत से 347 रन बनाए हैं।
खास बात है कि नाजुक वक्त पर वह अपनी रंगत दिखाने में कामयाब रहे हैं। उनके साथ युवराज सिंह (21 मैच, 441 रन, स्ट्राइक रेट 144.21, 11 विकेट), रोहित शर्मा (17 मैच, 385 रन), सुरेश रैना (15 मैच, 349 रन, सर्वोच्च 101, 2 विकेट) और विराट कोहली (5 मैच, 185 रन) पर पूरा दारोमदार होगा।
विराट कोहली होंगे तुरुप के इक्के
मौजूदा फार्म के आधार पर विराट कोहली इस प्रतियोगिता में भी तुरुप के इक्के साबित हो सकते हैं। बेहतर टीम संतुलन के लिए धोनी को लेग स्पिनर अमित मिश्रा को अंतिम एकादश में जगह देनी होगी। अमित ने एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ धारदार गेंदबाजी की थी। अमित मिश्रा के उस प्रदर्शन को देखते हुए धोनी को अपने चहेते आर अश्विन को अंतिम 11 से बाहर रखना चाहिए।
बतौर ऑलराउंडर युवी और रैना का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। संयोग से ओपनर शिखर धवन ने अपनी रंगत पा ली है। उम्मीद यही है कि वह भारत को बढ़िया शुरुआत दिलाएंगे।
पिछले तीन टी-20 विश्व कपों में भारतीय टीम अगर मगर के फेर में फंस कर रह गई और खिताब नहीं जीत पाई। यदि धोनी इस बार दिल के बजाय दिमाग से सोचें और फैसले लें तो टीम इंडिया कमाल कर सकती है।
ऐसे तय होगा फाइनल का सफर
क्वालीफाइंग यानी पहले दौर में आठ टीमों को दो ग्रुपों में बांटा गया है। ग्रुप-ए में मेजबान बांग्लादेश, अफगानिस्तान, हांगकांग और नेपाल, जबकि ग्रुप बी में हॉलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), आयरलैंड और जिम्बॉब्वे की टीमें हैं। दोनों ग्रुपों में टॉप पर रहने वाली एक-एक टीम दूसरे दौर यानी सुपर 10 में प्रवेश करेगी।
सुपर 10 के ग्रुप 2 में भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के साथ ग्रुप-ए में टॉप पर रहने वाली टीम होगी। ग्रुप-1 में श्रीलंका, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड की टीमों के साथ ग्रुप-बी में टॉप पर रहने वाली टीम को जगह मिलेगी। दोनों ग्रुप से दो-दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। फाइनल 6 अप्रैल को होगा।
कैसी है अन्य टीमों की चुनौती
पाक में है दम: शाहिद अफरीदी, उमर अकमल और कप्तान मोहम्मद हफीज बेहतरीन फॉर्म में हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि पाकिस्तान टी-20 खिताब जीतने की कामयाबी को बांग्लादेश में दोहराने का दम रखता है।
श्रीलंका हसरत पूरी करने को बेताब: एंजेलो मैथ्यूज, संगकारा, तिरिमाने और मलिंगा जैसे धुरंधर दो बार की उपविजेता श्रीलंका की टी-20 विश्व कप जीतने की हसरत को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
इंडीज में है खिताब कायम रखने का दम: तूफानी क्रिस गेल, ऑलराउंडर डैरन सैमी, डवेन ब्रावो और कंजूस स्पिनर सुनील नारायण टीम को मजबूत बनाते हैं। मौजूदा विजेता वेस्टइंडीज में खिताब पर कब्जा बरकरार रखने का दम है।
दक्षिण अफ्रीका लिख सकता है नयी दास्तां: एबी डिविलियर्स, डेल स्टेन, मॉर्ने मॉर्केल और पॉल डुमिनी पर पूरा दारोमदार है। दक्षिण अफ्रीका ′चोकर′ का ठप्पा उतार टी-20 विश्व कप जीत सकती है।
सबसे संतुलित है ऑस्ट्रेलिया: जॉर्ज बेली की अगुवाई वाली टीम में तुरुप के कई इक्के हैं। 2010 की उपविजेता और इस समय सबसे संतुलित दिख रही ऑस्ट्रेलियाई टीम खिताब की दौड़ में आगे है।
मुश्किल है राह न्यूजीलैंड की: 2007 में टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुँचने वाली किवी टीम के लिए बांग्लादेश में स्पिनरों को खेलना बड़ी चुनौती होगी।
इंग्लैंड से बहुत कम है उम्मीद: इंग्लैंड की टीम केविन पीटरसन जैसे धुरंधर के बाहर होने के कारण परेशानियों से जूझ रही है। ऐसे में स्टुअर्ट ब्रॉड की कप्तानी में इंग्लिश टीम बहुत उम्मीदें नहीं बंधाती।