भारत जहां क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग को लेकर परेशान है वहीं इंग्लैंड फुटबॉल में फिक्सिंग को लेकर त्रस्त है। इंग्लैंड के उत्तरी-पश्चिमी फुटबॉल लीग के सात खिलाड़ियों को कथित रूप से स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्रीय अपराध एजेंसी (एनसीए) के मुताबिक इन सभी फुटबॉलरों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच है जिसमें से 6 को पिछले साल दिसंबर में भी शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में यह सभी जमानत पर रिहा हो गए थे।
इस तरह अभी तक कुल 13 खिलाड़ियों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे स्पॉट फिक्सिंग और मनी लांड्रिंग में उनकी संलिप्तता को लेकर पूछताछ की जा रही है।
अभी भी हो रही है फिक्सिंग
एनसीए ने कहा, "द सन अखबार से रविवार को मिली सूचना के बाद हमने जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक फिक्सिंग अभी भी जारी है। हम फिलहाल इसके अलावा और कोई जानकारी नहीं दे सकते।"
ब्लैकबर्न रोवर्स के स्ट्राइकर्स डीजे कैंपबेल, ओल्डहैम एथलेटिक के पूर्व स्ट्राइकर्स क्रिस्टियन मोंटानो समेत छह खिलाड़ियों को इस बार गिरफ्तार किया गया है। हालांकि इन सभी खिलाड़ियों ने खुद को निर्दोष बताया है।
फुटबॉल में कैसा होता है स्पॉट फिक्सिंग
क्रिकेट की तरह ही फुटबॉल में भी मैच के किसी खास हिस्से को फिक्स किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर जैसे खिलाड़ी जान बूझकर येलो कार्ड की गलती करता है, या फिर किसी खास निर्धारित समय में किसी खास खिलाड़ी को खास तरह से परेशान करता है।
इसके अलावा फुटबॉलर कॉर्नर को भी फिक्स करता है।