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दोतरफा चुनौती के साथ उतरेगी टीम इंडिया

Mon, 27 Jan 2014 05:29 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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पुछल्ले बल्लेबाजों के दम पर ऑकलैंड वनडे को रोमांचक अंदाज में टाई कराने के बाद भारत अब चौथे मैच में जीत हासिल कर न सिर्फ सीरीज में बने रहना चाहेगा बल्कि न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतिम मैच तक सीरीज को बचाए रखना चाहेगा।
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टीम इंडिया को हैमिल्टन में मंगलवार को सुबह साढ़े छह बजे से शुरू हो रहे 'करो या मरो' के इस मुकाबले में हर हाल में जीत दर्ज करना होगा। अगर धोनी की टीम यह मैच हार जाती है तो वह सीरीज भी गंवा बैठेगी। दूसरा वनडे हैमिल्टन में हुआ था जहां भारत डकवर्थ-लुइस नियम से हार गया था।

भारत ने पांच मैचों की वनडे सीरीज के शुरुआती दोनों मैच हारे हैं जबकि तीसरा वनडे टाई रहा था। मेजबान टीम अभी इस सीरीज में 2-0 से आगे है। भारतीय टीम अगर शेष बचे चौथे और पांचवें वनडे जीत हासिल करता है तो वह सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराकर विदेशी धरती पर खराब प्रदर्शन के कारण धूमिल हुई अपनी छवि को सुधार सकती है।
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फिर से शीर्ष रैंकिंग हासिल करने का मौका

ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को इंग्लैंड से वनडे सीरीज 4-1 से जीतने के साथ ही एक बार फिर वर्ल्ड रैंकिंग में शीर्ष स्‍थान पर अपना कब्जा जमा लिया है। आईसीसी की वनडे वर्ल्ड रैंकिंग की रेस अब बेहद दिलचस्प हो गई है।

शुरुआती दो वनडे हारकर भारत ने शीर्ष रैंकिंग गंवा दी थी लेकिन तीसरे वनडे को टाई कराने और पर्थ में इंग्लैंड की ऑस्ट्रेलिया पर रोमांचक जीत ने फिर से टीम इंडिया को नंबर वन बना दिया।

भारत को अब नंबर वन की रैंकिंग पाने के लिए अगले दोनों मैच जीतने होंगे। यदि हैमिल्टन में मेजबान टीम यह मैच जीत जाती है तो वह सीरीज पर 3-0 की अजेय बढ़त बना लेगी।

शॉर्ट बॉल अभी भी भारत के लिए समस्या

भारत भले ही तीसरा वनडे मैच टाई कराने में सफल रहा हो, लेकिन उसके लिए शॉर्ट बॉल की समस्या बनी हुई है। शॉर्ट बॉल पिच पर भारत के युवा बल्‍लेबाज खेलने में काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

ओपनर शिखर धवन, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे और सुरेश रैना जैसे बल्लेबाज रन बनाने में नाकाम हो रहे हैं। हालांकि तीसरे वनडे में आर अश्विन और रवींद्र जडेजा ने संघर्षपूर्ण बल्‍लेबाजी कर टीम की संभावित हार को टाल दिया था।

अब भारत के लिए अगले दोनों मैच बेहद खास हैं ऐसे में बल्‍लेबाजों को इस समस्या से निजात पाकर बड़ी पारी खेलना ही होगा। अगर बल्‍लेबाज ऐसा कर पाने में नाकाम रहते हैं तो टीम इंडिया न सिर्फ सीरीज गंवाएगी बल्कि नंबर वन का ताज भी चला जाएगा। वर्ल्ड चैंपियन होने के नाते जो बदनामी मिलेगी वो अलग।

कीवी आक्रमण को तोड़ना होगा अहम

सीरीज शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि न्यूजीलैंड की टीम भारत के सामने कहीं नहीं ठहरेगी। लेकिन उसके गेंदबाजों ने धारदार गेंदबाजी कर भारतीय बल्‍लेबाजों के होश फाख्ता कर दिए।

न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज टिम साउदी, हामिश बैनेट, मिचेल मैक्कलेंघन और कोरी एंडरसन भारतीय बल्‍लेबाजों को रन बनाने का बहुत मौका नहीं दे रहे हैं। आलराउंडर एंडरसन ने पिछले मैच में पहली बार पांच विकेट झटके हैं।

हालांकि शिखर धवन और रोहित शर्मा ने पिछले मैच से कुछ लय हासिल कर लिया है। ऐसे में इन दोनों बल्‍लेबाजों पर तेज आक्रमण कर कीवी गेंदबाजों की लय‌ बिगाड़ने का जिम्‍मा होगा। अगर दोनों में से कोई भी इस मकसद में कामयाब होते हैं तो यह भारत के लिए बड़ी राहत की बात होगी।

पुरानी गलती दोहराने से बचना होगा धोनी को

कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अब टॉस जीतने की सूरत में पहले बल्‍लेबाजी करने का फैसला लेना चाहिए। पिछले तीनों मैचों में धोनी ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला लिया था।

पहले गेंदबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों ने खूब रन दिए थे। ऐसे में अगर वह टॉस जीतते हैं तो पहले उन्हें बल्‍लेबाजी करने का फैसला लेना होगा। जिससे इस बार गेंदबाजों के बजाए बल्‍लेबाजों को बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका दिया जाना चाहिए।

जहां तक हैमिल्टन की पिच की बात है तो तीसरे वनडे की ही तरह इसे भी धीमी पिच माना जा रहा है तथा दूसरी पारी में यह और भी अधिक धीमी हो सकती है। ऐसे में जो भी टीम टॉस जीतेगी वह पहले बल्लेबाजी ही करने का प्रयास करेगी।
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विकेट झटकने और रन रोकने की होगी जिम्मेदारी

भारतीय गेंदबाजों में मोहम्मद शमी पिछले कुछ मैचों में बहुत प्रभावशाली रहे हैं। लेकिन अन्य गेंदबाज ऐसा नहीं कर पा रहे, जिससे विपक्षी टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब हो जाते हैं।
 
हालांकि भारतीय गेंदबाजों में भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी, आलराउंडर रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन और वरुण ऐरोन पर विकेट निकालने की और विपक्षी टीम की रन गति रोकने की अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी। अश्विन सीरीज में अब तक पूरी तरह से असफल रहे हैं लेकिन ऑकलैंड वनड में उन्होंने जिस अंदाज में बल्‍लेबाजी की है उससे उनमें आत्मविश्वास जगेगा और बेहतरीन गेंदबाजी कर सकेंगे।

गेंदबाजों की विफलता की दिशा में भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ सकता है इसलिए जरूरी है कि टीम संयुक्त प्रयास करे और हर खिलाड़ी जीत के लिए अपनी अपनी ओर से योगदान दे। विपक्षी टीम के गेंदबाज भी एक बार फिर अपने बाउंस और शॉर्ट पिच बॉलों के सहारे भारतीय बल्‍लेबाजों पर निशाना बनाएंगे।
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