सिद्ध पुरुष रविनाथ महाराज महासमाधि में लीन हो गए है। मंगलवार को उनके शिष्य योगी रमणनाथ एवं योगी भावनाथ ने नाथ योगेश्वरों की उपस्थिति में उनके पार्थिव शरीर को समाधि में विराजमान किया। इस दौरानन हजारों सेवकों और श्रद्धालुओं ने नम आंखों एवं संपूर्ण श्रद्धा के साथ अंतिम विदाई दी।
योगी रमणनाथ जी ने बताया कि नाथ संप्रदाय से दीक्षा लेने के बाद करीब दो दशक तक रविनाथ जी महाराज ने भारत भ्रमण किया। इसके बाद पिछले तीन दशकों से वह हरमाड़ा में जोड़ला स्थित श्रीनाथ कुंज में निवास कर रहे थे। रविनाथ जी को श्रद्धालु नाथ जी महाराज के नाम से जाने जाते थे। उनके दो संदेश बहुत महत्वपूर्ण रहे। इनमें पहला यह कि हर व्यक्ति को इस जीवन के लिए ईश्वर के प्रति सतत आभार अवश्य करना चाहिए। दूसरा यह कि हर व्यक्ति अपने आप में शक्ति पुंज है, लेकिन सही मार्ग पर चल कर सतत प्रयत्नशील रहकर वह इस स्थिति तक पहुंच सकता है। श्री नाथ कुंज में अब 27 मई को सुबह समाधि पूजन, श्रद्धांजलि सभा और चादर रस्म के साथ भंडारे का आयोजन किया जाएगा।