फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साल 2012 में दुनिया की प्रमुख घटनाएं

Tue, 01 Jan 2013 03:20 PM IST
बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2012 में जहां अमेरिका ने ओबामा को एक और मौका दिया तो चीन सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ा। वहीं मध्य पूर्व एक बार फिर जलता रहा चाहे वो मिस्र हो, सीरिया या गजा। लेकिन उम्मीद की किरण पाकिस्तान की मलाला ने जगाई।
विज्ञापन


मलाला बनी उम्मीद
पाकिस्तान के बेटी...ये खिताब मिला है 15 साल की मलाला यूसुफ़ज़ई को. लेकिन इस खिताब के पीछे की कहानी मलाला के लिए बेहद तकलीफ भरी रही। पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाने वाली नन्हीं मलाला तालिबान को नागवार गुजरी।

नौ अक्तूबर 2012 को रोज की तरह वो स्कूल से वापस आ रही थी। उसी वक़्त तालिबान लड़ाकों ने उस पर जानलेवा कर दिया। लेकिन मलाला बच गई। अभी ब्रिटेन में उसका इलाज चल रहा है। माना जा रहा है कि उसका इलाज काफी लंबा चलेगा।
विज्ञापन


मलाला के पिता को एक साल के लिए बर्मिंघम में नौकरी करने की इजाजत मिली है। नवंबर में दुनिया भर में मलाला के समर्थन में मलाला दिवस भी मनाया गया। मलाला 2009 में 11 साल की उम्र में उस समय पहली बार सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने बीबीसी उर्दू सेवा के लिए डायरी लिखना शुरू किया था।

बराक ओबामा को दोबारा मौका
बराक ओबामा ने जब 2008 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीता था, तो उन्होंने अमेरिका के पहले काले राष्ट्रपति बनकर इतिहास रचा था। चार साल बाद 2012 में उन्हें अमेरिका के लोगों ने एक बार फिर परखा। उनके प्रतिदंद्वी थे रिपब्लिकन पार्टी के मिट रोमनी। सर्वेक्षणों के मुताबिक मुकाबला बेहद नजदीकी रहने वाला था।

अंतत नतीजा बराक ओबामा के पक्ष में गया। वे दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए। लेकिन सर्वेक्षणों के उलट मुकाबला कांटे का नहीं था। राष्ट्रपति ओबामा ने जीत के लिए 270 इलेक्टोरल वोट आसानी से जीत लिए। हालांकि रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है।

सैंडी तूफान ने बरपाया कहर
एक ओर जहां अक्तूबर-नवंबर में अमेरिका में चुनावी तूफान का जोर था तो उसी दौरान अमेरिका का पूर्वी तट तूफान सैंडी की चपेट में आ गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2005 के तूफान कटरीना और 1992 के तूफान एंड्रयू के बाद ये सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाला तूफान था।

इसने 120 से ज्यादा लोगों की जान ली जिसमें से न्यूयॉर्क में ही 40 से ज्यादा लोग मारे गए। हजारों लोग बेघर हो गए। बहुत से लोग अब तक बाढ़ में तबाह हुए घरों को लौट नहीं पाए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी में हुआ।

हेती में भी सैंडी का प्रकोप देखा गया। सैंडी पीड़ितों के लिए पैसा जुटाने के मकसद से कुछ दिन पहले ही न्यूयॉर्क में दुनिया के बड़े सितारों ने कॉन्सर्ट किया जिसमें ब्रूस स्प्रिंगस्टीन और रोलिंग स्टोन सदस्य भी शामिल थे।

जिनपिंग चीन के अगले राष्ट्रपति
दुनिया के बदलते सत्ता समीकरण में चीन विश्व के अग्रणी देशों में से है। चीन में हर दस साल में नेतृत्व परिवर्तन होता है। नवंबर 2012 में एक बार फिर बारी थी परिवर्तन की। शी जिनपिंग सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चुने गए और देश के अगले राष्ट्रपति होंगे।

एक अन्य बदलाव में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की नई स्थायी समिति के सदस्यों की संख्या नौ से घटा कर सात कर दी गई। नई समिति में शी जिनपिंग, ली केचियांग, छांग डेजियांग, लियु युनशान, वांग किशान और छांग गाओली शामिल हैं।

पोलित ब्यूरो ही देश के लिए सभी अहम फैसले लेती है, जिन्हें लागू करने के लिए कम्युनिस्ट की केंद्रीय समिति की मंजूरी जरूरी होती है। पिछले कुछ समय में चीन की आर्थिक वृद्धि में भी गिरावट आई है। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने कई चुनौतियां हैं।

सीरिया में विद्रोह की आग
सीरिया में पिछले डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से राष्ट्रपति बशर असद के खिलाफ विद्रोह चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं। हालांकि मानवाधिकार संगठन मरने वालों की संख्या 35 हजार से ज्यादा बताते हैं। वहीं हज़ारों लोग पड़ोसी देशों में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हैं।

पिछले कुछ दिनों में तो तनाव और भी बढ़ गया है। आशंका जताई जा रही है कि सीरिया विद्रोहियों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि सीरिया सरकार इससे इनकार रही है। नेटो ने तो सीरिया से लगी तुर्की की सीमा पर पेट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें लगाने को मंजूरी भी दे दी है।

मिस्र में फिर गहराया संकट
मिस्र में पिछले साल तहरीर चौराहे पर हजारों लोग जमा हुए थे जो होस्नी मुबारक के खिलाफ नारे लगा रहे थे- सत्ता छोड़ो। मुबारक के सत्ता छोड़ने के बाद वहां नए राष्ट्रपति चुनाव हुए और मुस्लिम ब्रदरहु़ड के मोर्सी राष्ट्रपति चुने गए।

लेकिन करीब डेढ़ साल बाद नवंबर 2012 में राजधानी काहिरा में एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। राष्ट्रपति मोर्सी ने एक आदेश के तहत असीमित शक्तियां हासिल कर ली। संविधान का नया मसौदा भी तैयार किया गया। लोग दोनों के खिलाफ उठ खड़े हुए।

मिस्र बंटा हुआ है। कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। कुछ लोग मोर्सी के खिलाफ हैं तो कुछ उनके समर्थन में हैं। बहुत से लोगों में गुस्सा है कि पिछले साल की क्रांति के बाद भी उनके जीवन में कोई बदलाव नहीं आया है।

सुर्खियों में रहा गजा
मध्य पूर्व में इस साल गजा एक बार फिर सुर्खियों में रहा। इलाके में हुई हिंसा में 90 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए जबकि तीन इसराइलियों की मौत हुई। गजा पट्टी से इसराइल के खिलाफ किए गए रॉकेट हमलों के जवाब में इसराइल ने हमले शुरू किए जिसके बाद हिंसा तेज हो गई।

इसराइल के हवाई हमले में फलस्तीनी संगठन हमास के सैन्य प्रमुख अहमद सैयद खलील अल जबारी की मौत हो गई। ये संघर्ष आठ दिन तक चला जिसके बाद हमास के साथ संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद फलस्तीनी गुट हमास के निर्वासित नेता खालिद मेशाल ने गजा पट्टी की यात्रा शुरू की है। ये पिछले चालीस साल में फलस्तीनी इलाके की उनकी पहली यात्रा है। मेशाल चाहते हैं कि ये मेल-मिलाप हो जाए मगर ग़ज़ा के हमास नेता इसके पक्ष में नहीं हैं।

बर्मा में जातीय हिंसा
बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा का मामला न सिर्फ बर्मा बल्कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भी छाया रहा। बर्मा में पश्चिमी रखाइन प्रांत में बौद्धों और मुसलमानों के बीच झड़पों में इस साल 90 से ज्यादा लोग मारे गए। बर्मा की सरकार कई वर्षों से रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश से आए अवैध-प्रवासी बताती रही है।

हालांकि रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमान कई पीढ़ियों से मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या 'धरती पर सबसे ज़्यादा सताए गए अल्पसंख्यक' हैं। रखाइन में स्थानीय बौद्ध और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच इस साल जून में शुरू हुई झड़पों के बाद से अब तक एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

शाही गद्दी पर महारानी के 60 साल
वर्ष 2012 में शाही गद्दी पर महारानी एलिजाबेथ के 60 साल पूरे हो गए। इस मौके पर उनके सम्मान में ब्रिटेन में शानदार समारोह हुए। राजकुमारी एलिजाबेथ का जन्म 21 अप्रैल को लंदन के मेफेयर में हुआ था।

वे ड्यूक एंड डचेज ऑफ यॉर्क की बेटी हैं, उनके पिता आगे चलकर किंग जॉर्ज VI कहलाए। उनका पूरा नाम एलिजाबेथ एलेक्ज़ेंड्रा मैरी है। 1952 में उनके पिता की मौत के बाद उन्हें महारानी घोषित किया गया।

वे ब्रिटेन के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली दूसरी महारानी हैं। सबसे लंबे समय तक सत्ता में रही हैं क्वीन विक्टोरिया जिन्होंने 63 वर्ष तक राज किया।

ग्लोबल वार्मिंग पर ठंडी रही दोहा वार्ता
दुनिया में कहीं गर्मी अधिक पड़ रही है, तो कहीं अप्रत्याशित बर्फबारी। ग्लेशियर पिघल रहे हैं और इस सबको जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है।

दिसंबर 2012 में दोहा में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता हुई। इसमें सैंद्धातिक तौर पर तो ऐतिहासिक पहल की गई लेकिन असल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती को लेकर कुछ खास नहीं हुआ। सम्मेलन में पहली बार कहा गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हुए नुकसान के लिए अमीर देशों को गरीब देशों को मुआवज़ा देना चाहिए।

विकासशील देशों ने इसका स्वागत तो किया लेकिन जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी की आलोचना की। क्योटो प्रोटोकॉल को भी 200 देशों ने 2020 तक बढ़ा दिया गया। लेकिन नई संधि बनाने पर भी सहमति हुई जो सभी देशों पर बाध्य होगी।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें