टेनिस की सर्वाधिक प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता की खासियत उसके घास भरे मैदान हैं, लेकिन इस बार यह घास ही विंबलडन की प्रतिष्ठा पर मानो धब्बा लगाने को आमादा है। अभी खेल जोर भी नहीं पकड़ पाया है कि लंबी घास पर फिसलकर कई दिग्गज चोटिल हुए हैं, तो कुछ को मजबूरन बाहर होना पड़ा है।
ऐसे में खिलाड़ियों के क्षोभ को समझा जा सकता है। चोटिल होने के कारण परास्त हुईं मारिया शारापोवा ने ग्रास कोर्ट को खतरनाक कहा है, तो एक दूसरी खिलाड़ी ने घास की लंबाई पर ही सवाल उठा दिए। इस संयोग पर जरूर ध्यान जाता है कि लंबे समय से हेड ग्राउंडस्मैन की भूमिका निभा रहे शख्स की विदाई के बाद यह पहला आयोजन है, लेकिन आयोजन समिति का कहना है कि ये कोर्ट वैसे ही हैं, जैसे पहले थे।
तर्क यह भी दिया जा रहा है कि हर बार प्रतियोगिता की शुरुआत में कोर्ट पर फिसलन होती है, पर बाद में सब ठीक हो जाता है। लेकिन राफेल नडाल, मारिया शारापोवा और रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों की इतनी जल्दी हार के लिए क्या फिसलन भरे ग्रास कोर्ट जिम्मेदार हैं? राफेल नडाल के बारे में एक हद तक ऐसा कहा जा सकता है, क्योंकि वह क्ले कोर्ट में बेहतर खेलते हैं। थोड़े ही समय पहले उन्होंने रिकॉर्ड आठवीं बार फ्रेंच ओपन जीता है।
इसके बावजूद विंबलडन के पहले ही दौर में एक अनाम खिलाड़ी से सीधे सेटों में वह जिस तरह हारे, वह ग्रास कोर्ट पर उसकी अधूरी तैयारी के बारे में ही बताता है। दो बार का यह विंबलडन चैंपियन पिछले विंबलडन में भी दूसरे दौर में बाहर हो गया था। अलबत्ता पिछली बार के चैंपियन रोजर फेडरर का बाहर होना इस टूर्नामेंट में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर है। करीब एक दशक में यह पहली बार है, जब ग्रास कोर्ट का यह दिग्गज क्वार्टर फाइनल से पहले ही बाहर हो चुका है।
नोवाक जोकोविच और सेरेना विलियम्स जैसों की खेल प्रतिभा इस फिसलन भरे मैदान पर भी हालांकि अक्षुण्ण हैं। इसके बावजूद तीन दिग्गजों की हार और खासकर शारापोवा का कोर्ट में बार-बार गिरना टेनिस के एक गौरवशाली युग के खत्म होने का आभास दिलाता है। इंग्लैंड के एंडी मरे नए धूमकेतु की तरह उभरते हैं या ग्लैमर गर्ल जिनी बोकार्ड मारिया शारोपावा की जगह लेती हैं, यह देखना अभी शेष है।