भारत और पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रियों के बीच पिछले हफ्ते ही वाघा-अटारी सीमा को कारोबारी वाहनों के लिए चौबीसों घंटे खुला रखने पर सहमति बनी है, जिससे द्विपक्षीय कारोबार को मजबूती देने में मदद मिलेगी। लेकिन दूसरी ओर नियंत्रण रेखा पर एक बार फिर जिस तरह से पाकिस्तान ने कारोबारी वाहनों और श्रीनगर-मुजफ्फराबाद तथा पुंछ और रावलकोट के बीच चलने वाली बस सेवाओं को रोक दिया है, उससे उसकी नीयत पर शक होता है।
असल में सीमा पार से आने वाले बादाम से लदे एक ट्रक में सौ करोड़ रुपये के मादक पदार्थ मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया, जिसे पाकिस्तान ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तानी सेना ने इस ट्रक को अपनी सीमा से बेरोकटोक जाने दिया था! इससे इन आशंकाओं को ही बल मिलता है कि पाकिस्तानी एजेंसियां कारोबारी वाहनों में सामान की आड़ में मादक पदार्थों की तस्करी करती हैं और इसके जरिये मिलने वाले धन का इस्तेमाल भारत में आतंकी गतिविधियों में किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर के बीच 2005 में कारवां ए अमन और राहे मिलन नाम से दो बस सेवाएं शुरू की गई थीं और उसके बाद 2008 से कारोबारी वाहनों की आवाजाही भी शुरू कर दी गई। मगर घुसपैठ और नियंत्रण रेखा पर होने वाले तनाव की वजह से ये सेवाएं कई बार रोकी जा चुकी हैं। वाघा-अटारी की तरह नियंत्रण रेखा से भी दोनों देशों के बीच व्यापार की असीम संभावनाएं हैं, इसके अलावा दोनों देशों के नागरिक भी सीमा पार बसे अपने रिश्तेदारों से मिलने इन रास्तों से आते-जाते हैं।
ऐसे में यह सोचने की जरूरत है कि रिश्ते के इस पुल को आखिर कौन-सी ताकतें ध्वस्त करना चाहती हैं? हैरत की बात है कि भारत के साथ कारोबार की अपार संभावनाओं के बाद भी पाकिस्तान अड़ियल रवैया अपनाता आया है। दोनों देशों के बीच 10 अरब डॉलर के सालाना व्यापार की संभावनाएं हैं, लेकिन पिछले वर्ष यह तीन अरब डॉलर का आंकड़ा भी नहीं पार कर सका। आतंकवाद से खुद भी जूझ रहे पाकिस्तान को यह समझने की जरूरत है कि उसके आर्थिक और कारोबारी हित भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में ही सुरक्षित हैं।