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नुकसान की भरपाई कौन करेगा

Mon, 28 Oct 2013 07:18 PM IST
नई दिल्ली
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ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में यों बारिश तो थम-सी गई है, लेकिन बाढ़ का पानी अब भी लाखों लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। अक्तूबर के महीने के आखिरी हफ्ते में इन राज्यों का बारिश और बाढ़ की वजह से जो हाल हो गया है, उसके लिए प्राकृतिक कारण तो जिम्मेदार हैं ही, ऐसी आपदाओं से निपटने की अपर्याप्त तैयारी भी एक बड़ी वजह है।
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हालांकि इसी महीने ओडिशा में आए फैलिन तूफान से निपटने में जो मुस्तैदी दिखाई गई थी, उससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी थी, जिसकी वजह से ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार की तारीफ भी हुई। लेकिन ओडिशा या आंध्र प्रदेश ही नहीं, असम सहित उत्तर और पूर्व के राज्यों में हर वर्ष बाढ़ एक बड़ी समस्या बन जाती है। फिर इस वर्ष तो मानसून भी देर तक सक्रिय रहा।

अभी बाढ़ और बारिश से प्रभावित तीनों राज्यों ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की स्थिति का आकलन करें, तो वहां लाखों हेक्टेयर में लगी कपास, धान, मक्के, मूंगफली और गन्ने की फसल चौपट हो गई है! इससे पहले जब फैलिन तूफान आया था, तब भी चार हजार करोड़ रुपये के करीब की धान की फसल बर्बाद हो गई थी।
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इससे हजारों किसानों को तो भारी नुकसान हुआ ही है, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में इसका देश के खाद्य उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा। जहां तक कपास की खेती की बात है, तो इसके कर्ज की वजह से विदर्भ और आंध्र प्रदेश के न जाने कितने किसान पहले ही बर्बाद हो चुके हैं।

असल में, बाढ़ और बारिश से सर्वाधिक नुकसान किसानों और मछुआरों को ही होता है, क्योंकि इससे उनके जीवनयापन का जरिया ही उजड़ जाता है और कई बार तो सालभर की उनकी कमाई एक झटके में ही निकल जाती है। इस वक्त बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती लोगों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की है। इसके अलावा वहां जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो गया है। असल में यह सोचने का वक्त आ गया है कि ऐसी प्राकृतिक आपदाएं सिर्फ प्रभावित क्षेत्रों में ही कहर नहीं बरपाती हैं, प्रकारांतर में उसका असर पूरे देश पर भी पड़ता है, जिनसे साझा प्रयास से ही निपटा जा सकता है।
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