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पहलगाम में फंसे शहर के 15 लोग

Wed, 10 Sep 2014 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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श्रीनगर घूमने गए छोटे बेटे प्रवेश गोयल और दामाद रोहित गुप्ता से चार दिन पहले आखिरी बार बातचीत हुई। आने के बारे में पूछा तो गला रुंध आया, नम आंखों से बोले कि पापा, यहां हालात नियंत्रण से बाहर हैं।
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पहल गांव के एक होटल हिलटॉप में ठहरा हुआ हूं, न ही यहां बिजली है और न ही पीने का पानी है। अपना राशन-पानी लाकर होटल की किचन में खाना बनाकर गुजारा कर रहा था, तो होटल के मालिक ने भी खाना बनाने से मना कर दिया।

बाहर निकलता हूं तो हर तरफ पानी ही पानी है। बात सुनते-सुनते अचानक फोन कट गया। यह कहते हुए शास्त्री नगर में रहने वाले सुभाष चंद गोयल और उनकी पत्नी प्रेमलता कुछ देर के लिए खामोश हो गईं।
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वहीं अमर उजाला रिपोर्टर से बात करते हुए फिर से उनको फोन लगाया, लेकिन फोन नेटवर्क कवरेज क्षेत्र से बाहर बता रहा था। देखते ही देखते मां प्रेमलता की आंखें भर आईं। एक टेबल के ऊपर रखी अपने बच्चों की तस्वीर को सीने से लगाते हुए बोलीं... पता नहीं, किस हाल में होंगे मेरे लाल।

जहन्न्नुम जैसे हालातों से गुजर रहे जन्नत में जिंदगी बचाने की इस जंग में सुभाष चंद के परिवार के 15 सदस्य फंसे हुए है। जिसमें उनके परिवार के ही सात बच्चे भी शामिल है। पांच सितंबर के बाद उनका अपने बच्चों से कोई भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। केंद्र सरकार व मीडिया द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन भी जवाब दे गई है।

एक हेल्पलाइन पर घंटी जाती है, लेकिन उसे कोई नहीं उठा रहा है। हिम्मत कर जिला प्रशासन से मदद के लिए अपील की है कि कोई तो उन्हें अपनों का हालचाल बता दें। जब से परिवार के और सदस्यों को इस घटना का पता चला है, दिन में कई बार फोन करते है। अब तो परिवार वाले बस बप्पा के सामने आकर उनकी सलामती की प्रार्थना करते हुए आंखों में आंसू आने से नहीं रोक पाते।

8 दिन पहले गए घूमने
8 दिन पहले, यानी एक सितंबर को दिल्ली में फ्लाइट से सुभाष का छोटा बेटा और बड़ी बेटी अपने पूरे परिवार के साथ श्रीनगर के लिए रवाना हुए। साथ में उनकी पत्नी प्रेमलता की बहन का बेटा, दोस्त और उनके बच्चे भी शामिल है। श्रीनगर में शाम को पहुंचे और 2 सितंबर को गुलमर्ग घूमने के लिए गए और फिर 3 सितंबर को पहलगांव पहुंच गए। 4 सितंबर को पहल गांव से वापसी करनी थी, लेकिन बाढ़ के कहर के चलते चारों तरफ से रास्ते बंद हो गए और एक होटल में ठहर गए। पहलगांव से चलने की कोशिश भी की, पर करीब 40 किमी. ही चल पाए और आगे बहुत ज्यादा पानी के कारण वापस होटल की तरफ लौट आए।

कुदरत के कहर में फंसी 7 नन्हीं जान
कुदरत के इस कहर में सुभाष चंद गोयल का छोटा बेटा प्रवेश गोयल (29) पुत्रवधु नीतू गोयल (27), पोती काश्वी गोयल (4 महीने) के साथ बड़ी बेटी ऋतु गुप्ता (33), दामाद रोहित गुप्ता (37), उनके दो बेटे मयंक गुप्ता (12) व दिवांश गुप्ता (9), भांजा मनीष बंसल (36), सीमा बंसल (32) इनके दो बेटे सोहम (6), सक्षम (1), उसका दोस्त मुरली, पत्नी व दो बेटियां भी फंसी हुई है।

डीसी को लिखा पत्र, मिला आश्वासन
सुभाष के बड़े बेटे सुरेंद्र गोयल ने बताया कि उनके भाई और जीजा के परिवार की कोई खबर नहीं आई तो उन्होंने डीसी डॉ. अमित अग्रवाल को पत्र लिखा है। डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही उनके अपनों का कोई संदेश जरूर देंगे।
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