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वरुणा पार की आधी आबादी ‘प्यासी’

Fri, 05 Dec 2014 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
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काशी में गंगा किनारे साफ पानी की उपलब्धता का संकट है तो वरुणा पार इलाके की आधी आबादी को पीने का पानी तक मयस्सर नहीं।  जलकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार वरुणा पार इलाके को रोजाना
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90 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन (एमएलडी) चाहिए लेकिन आपूर्ति सिर्फ 45 एमएलडी की हो पा रही है। ऐसे में आसानी से यह समझा जा सकता है कि गर्मी के दिनों में इस इलाके के लोगों को पीने
का पानी कितनी जद्दोजहद के बाद मिल पाता होगा। यानी आम दिनों में यहां की आधी आबादी प्यासी ही रहती है।
वरुणा के किनारे विकसित हुआ काशी का आधा इलाका पेयजल समस्या से जूझ रहा है।
जेएनएनयूआरएम के तहत शहर के इस हिस्से में पेयजल आपूर्ति के लिए बीते आठ साल से काम जारी है लेकिन योजना का लाभ कब मिलेगा, यह साफ-साफ बता पाने की स्थिति में जल निगम और जलकल के अधिकारी नहीं हैं। इसके साथ ही शहर के पक्का महाल, बजरडीहा, कोल्हुआ, विनायका सहित कुछ अन्य
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निचले हिस्सोें में पेयजल आपूर्ति का संकट बारहों महीने रहता है। इसका कारण है कहीं लीकेज तो कहीं सौ साल पुरानी जर्जर पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति। इसके चलते इन इलाकों के लोगों को हैंडपंप या टैंकरों के सहारे अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। इस संबंध में जलकल के महाप्रबंधक बीके पांडेय ने कहा कि आगामी गर्मी के सीजन के पहले जेएनएनयूआरएम के तहत वरुणा पार इलाके में 10 ट्यूबवेल लग जाएंगे। इसके अलावा
 जिला योजना के लगभग दस करोड़ रुपये से भी वरुणा पार इलाके में पेयजल आपूर्ति की समस्या दूर की जाएगी।

हर साल नहीं होती ओवरहेड टैंकों की सफाई
जलकल विभाग के अनुसार गंगा से पानी लेने के अलावा इस समय शहर में 17 ओवरहेड टैंकों के सहारे पेयजल आपूर्ति की जाती है। इन ओवरहेड टैंक की सफाई प्रतिवर्ष होनी चाहिए, लेकिन ऐसा न होने से आमजन के घरों तक पहुंचने वाला पानी दूषित रहता है। हालांकि जलकल विभाग के अधिकारियों का
 दावा है कि सभी ओवरहेड की सफाई प्रतिवर्ष कराई जाती है। लीकेज और पुरानी पाइपलाइन के कारण पानी दूषित हो जाता है।

दूषित पेयजल आपूर्ति सही करने के लिए जारी हैं प्रयास
जलकल महाप्रबंधक बीके पांडेय ने बताया कि शहर की कई पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन सौ साल पुरानी है। ऐसे में जगह-जगह लीकेज के कारण सप्लाई का पानी कहीं-कहीं गंदा हो सकता है।
हालांकि शिकायत मिलने पर तत्काल समस्या दूर की जाती है। जेएनएनयूआरएम के तहत शहर में लगभग 750 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई गई है। जैसे-जैसे इसके जरिये आपूर्ति शुरू होगी, सारी समस्याएं दूर कर ली जाएंगी।

हमारे इलाके में दूषित पानी की सप्लाई होती है। आए दिन बालू मिला पानी आता है या पानी से अजीब सी दुर्गंध आती है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे सीधे सीवर का पानी ही नल से आ रहा हो। -मनोज, निवासी सिकरौल।
सप्लाई का पानी सीधे पीने लायक नहीं रहता। कभी पानी के साथ बालू आता है तो कभी काई। सप्लाई का पानी उबालकर या बढि़या वाटर प्यूरीफायर से शुद्ध होने के बाद ही पिया जा सकता है। -उज्ज्वल कन्नौजिया, निवासी मलदहिया।
जलकल की जलापूर्ति रामभरोसे है। आए दिन पानी में गंदगी रहती है या दुर्गंधयुक्त पानी आता है। हालत यह है कि घर में पानी आने के बावजूद पीने के लिए बाजार से खरीदना पड़ता है। -प्रभुदयाल सिंह, निवासी खोजवां।
हमारे इलाके में सप्लाई का पानी बेहद खराब आता है। आए दिन बदबूदार पानी की समस्या से हमें जूझना पड़ता है। इसकी शिकायत भी की जाती है लेकिन स्थायी तौर पर उपाय नहीं हो सका। - पप्पू यादव, निवासी लहरतारा।
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