पीजीआई के चिकित्सक संवेदनहीन हो गए हैं।
यहां कराह रहे मरीजों से पहले कागज, अल्ट्रासाउंड और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा जा रहा है।
सोमवार को भी ऐसा ही मामला सामने आया।
लेबर रूम में पहुंची दर्द से कराह रही एक गर्भवती का चिकित्सकों ने इलाज करने से मना कर दिया और कहा कि पहले अल्ट्रासाउंड करा कर लाओ। परिजनों का आरोप है कि महिला को लेबर रूम में ले जाने के बाद अल्ट्रासाउंड कराने की बात कहकर बाहर निकाल दिया गया। हालत ज्यादा खराब होने के कारण पीड़ित ने बरामदे में ही बच्चे को जन्म दे दिया। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से बार-बार गुहार लगाई गई, लेकिन कहा गया कि पहले अल्ट्रासाउंड करा कर लाओ। बरामदे में बच्चा पैदा होने के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने अंदर जाकर बताया तो उसे लेबर रूम में ले जाया गया।
परिवार ने सुनाई पीड़ा
मूलत: बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले मनोज ने बताया कि वे 22 सालों से रोहतक में रह रहे हैं। अब वे कैलाश कॉलोनी में रह रहे हैं। पुलिस लाइन में मजदूरी करने वाले मनोज ने बताया कि सोमवार सुबह 7 बजे अपनी पत्नी कुंजन को लेकर पीजीआई पहुंचा। कुंजन को वार्ड नंबर-2 के लेबर रूम में ले जाया गया। अल्ट्रासाउंड कराने की बात कहकर कुछ समय बाद उसे बाहर कर दिया। आरोप है कि स्टाफ ने कहा कि जब तक अल्ट्रासाउंड नहीं होगा, तब तक इलाज नहीं किया जाएगा। मनोज ने बताया कि 15 मिनट बाद ही उसकी पत्नी की बरामदे में डिलीवरी हो गई। मनोज की मां कुसुम भी कुंजन के साथ थी। उसने भी कर्मचारियों व डॉक्टरों से गुहार लगाई, लेकिन एक न सुनी गई। बाद में अल्ट्रासाउंड की भी जरूरत नहीं हुई। अब परिजनों ने जच्चा और बच्चा की हालत सही बताई है।
वर्जन
अल्ट्रासाउंड की जरूरत होगी, तभी कहा गया होगा। फिर भी इस बारे में इंचार्ज से बात करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
डॉ. चांद सिंह ढुल, निदेशक, पीजीआई, रोहतक।