ऑस्ट्रेलिया के युवा क्रिकेटर फिलिप ह्यूज की मौत ने सारी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। अपने छब्बीसवें जन्मदिन से सिर्फ तीन दिन पहले एक घरेलू मैच के दौरान उन्हें एक अन्य युवा गेंदबाज सीन एबोट की एक बाउंसर से ऐसी चोट लगी कि वह दोबारा होश में भी नहीं आ सके।
क्रिकेट के सवा सौ वर्ष से भी पुराने इतिहास में ऐसे हादसे गिन चुने हैं, जब किसी क्रिकेटर की मैदान में चोट लगने से मौत हो गई। इनमें भारत के रमन लांबा भी थे, जिनकी बांग्लादेश में एक मैच के दौरान गेंद लगने से मौत हो गई थी। मगर क्रिकेट को आमतौर पर फुटबॉल या रग्बी जैसे खेलों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें खिलाड़ियों के बीच गेंद को लेकर वैसी होड़ नहीं मचती, जिसमें चोट लगने का खतरा हो। खासकर ऐसे समय जब क्रिकेट में तेज गेंदबाजी का पहले जैसा खौफ न रहा हो, खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक सख्ती बरती जा रही हो और पहले से कहीं अधिक सुरक्षा के साजो-सामान मौजूद हों, ह्यूज की इस तरह मौत अचंभित करती है।
बेशक, ह्यूज ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में वापसी के लिए जद्दोजहद कर रहे थे, मगर वह सबसे कम उम्र में और वह भी अपने दूसरे ही टेस्ट में दोनों पारियों में शतक लगाने वाले बल्लेबाज के रूप में अपना नाम दर्ज करवा चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में 33 से अधिक और एकदिवसीय मैचों में करीब 36 के औसत को बुरा नहीं कहा जा सकता। यही नहीं, वह आईपीएल के जरिये भारत के क्रिकेट प्रेमियों के भी करीब थे, जहां वह मुंबई इंडियन की ओर से खेल चुके थे।
जाहिर है, उनका इस तरह जाना सिर्फ ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत के लिए ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकेगी। क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, मगर कोई सोच नहीं सकता कि उसका यह सच एक युवा बल्लेबाज की असमय मौत और एक युवा गेंदबाज के करियर पर प्रश्नचिह्न के साथ भी खड़ा हो सकता है। वाकई अभी सीन एबोट की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इस हादसे ने उन्हें भी भीतर से झकझोर दिया होगा।