सामूहिक बलात्कार को 'असंभव' बताने वाली मुलायम सिंह की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण और औरतों के प्रति उनकी पुरुषवादी सोच का एक और नमूना तो है ही, यह औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों को प्रकारांतर से जायज ठहराने का भी उदाहरण है। सामूहिक बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को सर्वोच्च न्यायालय न केवल समय-समय पर चिंताजनक बता चुका है, बल्कि इसी साल गैंगरेप के कुछ वीडियो पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उसने सीबीआई से मामलों की जांच करने के लिए कहा था। लेकिन मुलायम सिंह की अगर मानें, तो राष्ट्रीय राजधानी को हिला देने वाले निर्भया गैंगरेप समेत सामूहिक बलात्कार के तमाम मामले झूठे ही कहलाएंगे।
जब यौन अपराधों के खिलाफ सख्त सजा पर विचार हो रहा था, तब भी यह कहकर, कि लड़कों से गलतियां हो जाती हैं, इसके लिए क्या उन्हें फांसी दे दी जाएगी, वरिष्ठ समाजवादी नेता ने सामूहिक बलात्कार को सामान्य घटना बताने की कोशिश की थी। वर्षों पहले इन्हें हमने संसद में स्त्री आरक्षण के खिलाफ यह टिप्पणी करते भी सुना था कि इससे शहरी औरतों को ही फायदा होगा। हमारे देश में, खासकर उत्तर भारत के पुरुषवर्चस्ववादी समाज में औरतों के प्रति यह धारणा बनी हुई है।
यहां तक कि औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भी कोई छोटे और उत्तेजक कपड़ों को, कोई लड़कियों के देर रात बाहर रहने को, कोई जींस और मोबाइल को, तो कोई चाऊमीन को जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे सूबे का एकाधिक बार मुख्यमंत्री रह चुका शख्स अगर ऐसी टिप्पणी करता है, तो यह गंभीर और चिंतानजक है।
आखिर उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध कम नहीं हैं। बेशक मध्य प्रदेश और राजस्थान बलात्कार के आंकड़ों में सबसे ऊपर हैं, पर उत्तर प्रदेश का नंबर उनके ठीक बाद ही है। इतना ही नहीं, पिछले रविवार को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर सामूहिक बलात्कार का एक मामला सामने आया था, जिसमें शामिल लोग बाद में पकड़े भी गए। लिहाजा जिम्मेदार लोगों को ऐसी हल्की टिप्पणियों से परहेज करना चाहिए, जिनसे अंततः अपराधियों के ही हौसले बुलंद होते हैं।