स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए तकनीक को बढ़ावा देने पर जारी बहस के बीच एक चर्चा यह भी शुरू हो गई है कि किशोरों के गंभीर बीमारियों से लड़ने में स्मार्टफोन कितना कारगर हो सकता है।
कुछ शोधकर्ताओं का कहना है स्मार्टफोन के जरिए किशोरों को दिए गए सुझाव बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। इसके जरिए किशोरों की काउंसलिंग करने के साथ उन्हें समय पर दवाई लेने और कठिन समय में क्या कदम उठाया जाय इसका भी सुझाव उपलब्ध करवाया जा सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि लीवर ट्रांसप्लांट और टाइप -1 मधुमेह जैसी बीमारियों में किशोरों के लिए स्मार्टफोन कारगर हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में जब उनके स्मार्टफोन पर लगातार डॉक्टर की सलाह मिलती है तो वे अपने स्वास्थ्य के लिए ज्यादा अलर्ट रहते हैं। शोधकर्ताओं ने यह बात ऐसे समय में कही है जब दुनिया में टेलीमेडिसिन पर बहस छिड़ी हुई है।