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बैठे-बिठाए बस चबाने से बना सकते हैं बिजली

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कनाडा में इंजीनियरों ने एक ऐसा पट्टा बनाया है जो चबाने की प्रक्रिया से निकली ऊर्जा को बिजली में बदल देता है।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि ठुड्ढी से लगाया जाने वाला यह पट्टा एक दिन कान की मशीनों और अन्य गैजेटों में इस्तेमाल बैटरियों की जगह ले लेगा।

हालांकि इस्तेमाल किए जाने लायक ऊर्जा उत्पादन के लिए अभी इसकी क्षमता को बीस गुणा बढ़ाए जाने की ज़रूरत है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि इस्तेमाल किए गए 'स्मार्ट पदार्थ' की परतें बढ़ाकर ऐसा किया जा सकता है।

ये 'स्मार्ट पदार्थ' खिंचाव होने पर बिजली पैदा करता है।

यह शोधपत्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िजिक्स की जर्नल 'स्मार्ट मैटेरियल्स एंड स्ट्रक्चर्स' में प्रकाशित हुआ है।

'प्राकृतिक ऊर्जा'

शोधकर्ता डॉक्टर एदिन देलनवाज़ और जेरेमी वॉइक्स का मानना है कि जबड़ों की चाल से प्राकृतिक ऊर्जा निकाली जा सकती है।

डॉक्टर वॉइक्स ने बीबीसी से कहा, "प्रयोगों से हमे पता चला कि चबाने के दौरान हमारी ठुड्ढी सबसे ज़्यादा खिंचती है। अगर आपने कोई सुरक्षा गियर पहन रखा है तो ठुड्ढी से लगने वाले पट्टे से काफ़ी ऊर्जा बनाई जा सकती है।"

इस सिद्धांत पर शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट पदार्थ से एक पट्टा बनाया जो ठुड्ढी से बांधने पर एक मिनट तक च्युईंग गम चबाने से 18 माइक्रोवॉट ऊर्जा उत्पादन करने में कामयाब रहा।

चबाने से प्रतिदिन 580 जूल तक ऊर्जा उत्पादित की जा सकती है।

पट्टे में पीज़ेइल्केट्रिक पदार्थ का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि 18 माइक्रोवॉट ऊर्जा बहुत ज़्यादा नहीं है। कान की मशीन को चलाने के लिए भी इससे बीस गुणा ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है लेकिन डॉक्टर देलनवाज़ को लगता है कि पट्टो में स्मार्ट पदार्थ की परतें लगाकर ऐसा किया जा सकता है।

शोध से यह भी पता चला कि ऊर्जा उत्सर्जन के लिए पट्टे को कसकर बांधने की ज़रूरत नहीं है। पट्टों को हल्का बांधकर भी उतनी ही ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथहैंपटन के प्रोफ़ैसर स्टीवी बीबी कहते हैं, "आप इससे प्रत्यारोपण को तो ऊर्जा पहुँचा सकते हैं लेकिन इससे मोबाइल चार्ज नहीं किया जा सकेगा।"
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व्यवसायिक उपयोग

डॉक्टर वॉइक्स को उम्मीद है कि उनकी इस खोज के व्यवसायिक उपयोग भी किए जा सकेंगे।

वे कहते हैं, "मैं रोज़ाना साइकिल से दफ़्तर जाता हूँ और हेलमेट पहनता हूँ। हैलमेट के पट्टे से ब्लूटूथ डोंगल चार्ज क्यों नहीं किया जा सकता?"

ये संभावनाएँ भले ही अभी दूर की कौड़ी हों लेकिन ब्लूटूथ हैडसैट की चार्जिंग के लिए नई तकनीकों की तलाश कर रही कंपनियों ने डॉक्टर देलनवाज़ और वॉइक्स के काम में दिलचस्पी दिखाई है।

डॉक्टर वॉइक्स जोर देकर कहते हैं, "यह सिद्धांत का सिर्फ़ एक सबूत है, अभी हमने बहुत सीमित ऊर्जा ही पैदा की है।"
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