‘जन्नत’ को बाढ़ के कहर का ग्रहण लग गया है। वहां लोग जिंदगी को तरस रहे हैं।
लेकिन, आफत पर भारतीय सेना का हौसला एक बार फिर भारी पड़ रहा है। भारतीय वायु सेना और केंद्रीय राज्य सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) के जवान देवदूत की तरह आकर जान बचा रहे हैं। उनकी दिलेरी, सोच और उनकी व्यवस्था की जितनी तारीफ की जाए उतना कम है।
9 दिनों तक 15 परिजनों के साथ पहलगाम में फंसे शास्त्री नगर निवासी प्रवेश गोयल और उनकी पत्नी नीतू सकुशल घर लौट आए हैं। साथ लेकर आए हैं आफत की दास्तां और सेना की बहादुरी के किस्से।
नीतू का कहना है कि उन्होंने सोच लिया है कि बच्चों को बड़ा होने पर भारतीय सेना में भेजेंगे। बेटा-बहू और चार माह की पोती को सीने से लगाया तो परिजनों की आंखें भर आईं, लेकिन चेहरे पर खुशी भी लौटी।
रात 2.40 पर आया फोन तो यकीन नहीं
प्रवेश के पिता सुभाष चंद गोयल और बड़े भाई सुरेंद्र गोयल ने बताया कि रात 2 बजकर 40 मिनट पर फोन आया तो यकीन नहीं हुआ कि उनका परिवार दिल्ली पहुंच रहा है। प्रवेश ने अपने ऑफिस में भेजी मेल में बुधवार दोपहर को ही लिखा था कि हालात खराब हैं। कोई सहारा नहीं है। इसलिए अभी 4-5 दिन और लग जाएंगे। अचानक प्रवेश का फोन दिल्ली पहुंचने का आया तो यकीन नहीं हुआ।
हंगामा किया तो भेज दिया पहले
नीतू ने बताया कि दोपहर को वह, उनकी ननद ऋतु, सीमा बंसल और मोनिका सीधे सीआरपीएफ के कैंप में पहुंच गए। वहां जाकर खूब हंगामा किया, तब लिस्ट में नाम डाला और अवंतिपुरा एयरफोर्स स्टेशन पर लेकर गए। प्रवेश गोयल ने बताया कि बुधवार को उन्होंने पास में स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से अपने गुड़गांव कार्यालय में मेल की कि वे ठीक हैं। दोपहर 2 बजकर 37 मिनट पर सीआरपीएफ के जवान उन्हें भारतीय वायु सेना के बेस कैंप अवंतीपुरा में ले गए। रात पौने एक बजे उन्हें हवाई जहाज में बैठाया गया और रात 2 बजकर 40 मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए।
खाना खत्म होने के कगार पर, पानी भी कम
पहलगाम में एक होटल में रुके थे। होटल मालिक ने अपने ही किचन में खाना बनाने की अनुमति दे दी थी। लेकिन आखिर तक खाना समाप्त होने लगा था। नीचे से रसद न जाने के कारण दुकानों से भी बस दाल और चावल ही मिल रहा है और वह भी खत्म होने की कगार पर है। पीने के पानी की भी कमी हो गई थी।
दो घंटे आती है लाइट, फिर अंधेरा
प्रवेश ने बताया कि हालांकि भारतीय सेना, वायु सेना और सीआरपीएफ के जवान दिनरात लोगों को बचाने में जुटे हैं। स्थानीय लोग भी सैलानियों को मदद दे रहे हैं, लेकिन त्रासदी काफी भयंकर है। 2 घंटे बिजली आती है। बच्चे को फीड कराने, रात का खाना खाने के लिए और बनाने के लिए मोबाइल टॉर्च का प्रयोग किया जा रहा था।
श्रीनगर जाते तो पता नहीं क्या होता...
एक सितंबर को दिल्ली से फ्लाइट पकड़ी और श्रीनगर पहुंच गए। 2 को सोनमर्ग और 3 को पहलगाम। 4 को उन्हें वापस श्रीनगर पहुंचना था, लेकिन सुबह उठे तो चारों ओर पानी ही पानी था। भगवान का शुक्रिया अदा किया कि पहलगाम में थे तो बच गए, यदि श्रीनगर पहुंच जाते तो पता नहीं क्या होता।
8 बड़े और 7 नन्ही जान फंसी थी
कुदरत के इस कहर में सुभाष चंद गोयल का छोटा बेटा प्रवेश गोयल (29) पुत्रवधु नीतू गोयल (27), पोती भूमि गोयल (4 माह) के साथ बड़ी बेटी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 9 निवासी ऋतु गुप्ता (33), दामाद रोहित गुप्ता (37), उनके दो बेटे मयंक गुप्ता (12) व दिवांश गुप्ता (9), गुड़गांव के सेक्टर 43 निवासी भांजा मनीष बंसल (36), सीमा बंसल (32) इनके दो बेटे सोहम (6), सक्षम (1), उसका दोस्त दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-7 निवासी मुरली अग्रवाल, पत्नी मोनिका अग्रवाल व दो बेटियां आरुषि और अपेक्षा भी फंसी हुई थी।
मां ने मांगी मन्नत, बोली मिला सुकून
मां प्रेमलता और पिता सुभाष गोयल के साथ भाई सुरेंद्र व भाभी सोनिया भी सभी के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने न जाने सलामती के लिए कितनी मन्नत मांग ली। बेटे बहू के सकुशल लौटने के बाद घर में बधाई देने वालों का तांता लगा है। कहा कि आज पैर उठे हैं, दिल में सुकून है। मन्नतें बहुत मांगी है, उन्हें अब खुशी खुशी पूरा कर दूंगी।