पिंकी चौहान मौत मामले में एमडीयू प्रशासन ने रखा पक्ष खराब रिजल्ट के विरोध में आत्मदाह के बाद उठे विवाद से एमडीयू प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए खुद को मामले से अलग किया।
एमडीयू प्रशासन ने कहा, पिंकी चौहान के अंकों के बारे में छात्रा को गलतफहमी हुई। दरअसल कॉलेज की ओर से ही प्रेक्टिकल नंबर नहीं भेजे जाने से पिंकी के परिणाम केआगे आरएएल दर्शाई गई थी।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधू ने कहा कहना है कि 25 सितंबर को जारी किए गए परीक्षा परिणाम में पिंकी के परिणाम में आरएलए दर्शाया गया था क्योंकि भौतिकी विषय के प्रेक्टिकल अवॉर्डस कॉलेज प्रशासन की ओर से ही अपडेट नहीं किए गए थे। एमडीयू प्रशासन ने बताया कि ये केवल पिंकी चौहान का केस नहीं था, बल्कि इस कॉलेज के बीएससी-द्वितीय सेमेस्टर के सभी विद्यार्थियों के भौतिकी प्रेक्टिकल के अवॉर्ड्स अपडेट नहीं थे। यानी पिंकी के परिणाम में इस विषय में जीरो अंक नहीं थे। बल्कि परिणाम में एडब्ल्यू (अवॉर्ड वैटेड) दर्शाया गया था। 29 सितंबर को प्रेक्टिकल अवॉर्डस अपडेट होने के बाद उसके 60 अंक हो गए थे, जो कि उसके रिवाइज्ड परिणाम में दर्शाया गया है। डॉ. सिंधू ने कहा कि पिंकी चौहान के मैथ्स के थ्योरी पेपर में पहले 57 अंक थे। रिवाइज्ड रिजल्ट में 3 अंक ग्रेस मिलने के बाद कुल 60 अंक हो गए। ग्रेस मार्क आरएलए केस में नहीं दिए जाते इसलिए 25 सितंबर के परिणाम में नहीं दर्शाए गए थे। लेकिन 29 सितंबर को अपडेट अवॉर्डस मिलने के बाद ग्रेस मार्क देकर विद्यार्थी का परिणाम जारी किया गया था।
परिणाम री अपीयर था पिंकी का
डॉ. सिंधू ने बताया कि 29 सितंबर को पिंकी चौहान का परिणाम पूर्णतया: अपडेट कर दिया गया जिसमें भौतिकी केपेपर में उसे री-अपीयर किया गया था। कॉलेज की कई छात्राओं का परिणाम री-अपीयर था। इन सभी छात्राओं के परिणाम केसाथ पिंकी का परिणाम भी यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया था। जो अभी भी उपलब्ध है।
एजेंसी नहीं करती मूल्यांकन
परीक्षा नियंत्रक डॉ. सिंधू ने बताया कि यूनिवर्सिटी परीक्षा में मूल्यांकन का कार्य कोई बाहरी एजेंसी नहीं करती, बल्कि यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक विभागों, संबद्ध महाविद्यालयों और अन्य यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त शिक्षक ही मूल्यांकन का कार्य करते हैं।