शनिवार रात में ही गांव को जाने वाले सभी रास्तों की नाकेबंदी कर दी गई थी, पर ग्रामीण नहर, रजवाहे और खेतों से होकर आयोजन स्थल तक पहुंच गए।
पहली बार सात बजे सुबह पुलिस के साथ टकराव की नौबत आई। मगर ग्रामीणों के तेवर देख पुलिस शांत हो गई।
हजारों की भीड़ जुटने के बाद बिना किसी नेतृत्व के नौ बजे जैसे ही महापंचायत शुरू हुई, डीएम नवदीप रिणवा और एसएसपी दीपक कुमार पहुंच गए।
11 बजे डीआईजी के सत्यनारायणा और कमिश्नर मनजीत सिंह भी पहुंचे। डीआईजी ने लोगों को रोकने की कोशिश की तो भीड़ उग्र हो गई। बवाल ज्यादा न बढ़े, इसके मद्देनजर सभी अधिकारी कॉलेज कार्यालय में जाकर बैठ गए।
करीब साढ़े ग्यारह बजे महापंचायत में एक मत से पांच मांगें रखी गईं। इसका ज्ञापन देने विधायक संगीत सोम के भाई सागर सिंह सोम, विहिप नेता बलराज डुंगर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल अधिकारी के पास गए।
मगर गेट बंदकर बैठे अधिकारी बाहर नहीं निकले। इसका पता लगते ही हाथों में डंडा लिए महिलाएं बाहर आ गईं। उन्होंने अधिकारियों को ललकारा।
हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। तब ग्रामीण बाहर की ओर भागे। बेकाबू भीड़ ने प्राथमिक विद्यालय की चारदीवारी तोड़ पुलिस और उनकी गाड़ियों पर पथराव कर दिया।