प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में एक बार फिर चिकित्सा इंतजामों की पोल खुल गई।
बोहर में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक रजनीश (28) को पीजीआई में इलाज नहीं मिल सका। यहां के चिकित्सकों ने घायल के परिजनों को कहा कि ज्यादा जल्दी है तो मरीज को दूसरे अस्पताल में ले जाएं।
न वेंटिलेटर मिला और न ही सीटी स्कैन हो सका। सांसों की उम्मीद टूटते देख परिजनों को रजनीश को शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा।
बुधवार सुबह सड़क हादसे में पिता व दो साथियों को खो चुके रजनीश को पुलिस गंभीर अवस्था में आपात विभाग में छोड़ गई। यहां अज्ञात मरीज के तौर पर पहुंचे रजनीश को हरिओम सेवा दल के हवाले कर दिया गया। कुछ घंटे बाद रजनीश के जानकार पहुंचे तब तक उसकी हालत और खराब हो गई थी। हिमाचल से रजनीश के मित्र संदीप, बुआ के बेटे आकाश राणा, राजेश व गौरव राठौर पीजीआई पहुंचे।
बार-बार लगाई गुहार
घायल के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पीजीआई के चिकित्सकों से बार-बार उपचार की गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। डॉक्टरों ने कहा कि बगैर सीटी स्कैन रिपोर्ट के वे क्या कर सकते हैं? वेंटिलेटर भी खाली नहीं है। मरीज का उपचार करवाना है तो सीटी स्कैन करवा कर लाएं। लेकिन वे मरीज को अपनी जिम्मेदारी पर बाहर ले जाएं। आरोप है कि एक्स-रे रिपोर्ट लाने में भी स्टाफ ने अपनी मर्जी चलाई। मरीज को दवा देनी है या नहीं इसमें डॉक्टर स्वयं उलझे रहे। हालत बिगड़ने पर चिकित्सक को कहा तो जवाब मिला कि जब लावारिस हालत में मरीज आया तो भी वे उपचार कर रहे थे। अधिक जल्दी है तो अपने मरीज को यहां से ले जाओ। चिकित्सकों ने बताया कि उनके यहां सीटी स्कैन की मशीन खराब है, जो दो से तीन दिन बाद ठीक होगी। मजबूरी में रजनीश को एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। जहां उसे आईसीयू में रखा गया है और हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों का कहना है कि वे चिकित्सकों की लापरवाही की शिकायत आला अधिकारियों, सीएम और स्वास्थ्य मंत्री से करेंगे।
बोले अधिकारी
सीटी स्कैन की मशीन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक बंद थी। साफ-सफाई के दौरान कोई पुर्जा हिल गया था। बाद में इसे सही कर दिया गया।
- डॉ. रोहतास यादव, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस।
सीटी स्कैन मशीन कुछ समय के लिए खराब थी। वेंटिलेटर पर मरीज को रखने के लिए जगह खाली नहीं थी। परिजनों को कोई शिकायत है तो वे लिखित में दें। जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।
- डॉ. चांद सिंह ढुल, निदेशक, पीजीआईएमएस।